



जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में साहित्य और विचारों के साथ-साथ पुस्तकों के विमोचन का सिलसिला भी जारी रहा। इसी क्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी फेस्टिवल में पहुंचे, जहां उन्होंने अपने दामाद कार्तिकेय वाजपेई की किताब ‘द अनबिकमिंग’ का औपचारिक विमोचन किया। यह सत्र साहित्य प्रेमियों के लिए खास रहा, जिसमें लेखक की सोच, विषयवस्तु और समकालीन संदर्भों पर चर्चा की गई।
कार्तिकेय वाजपेई पेशे से वकील हैं और उनकी यह पुस्तक सामाजिक, वैचारिक और व्यक्तिगत संघर्षों के विभिन्न पहलुओं को सामने लाती है। पुस्तक विमोचन के अवसर पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया ने भी ‘द अनबिकमिंग’ पर अपने विचार रखे। उन्होंने पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा और दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए इसे समकालीन विमर्श के लिए प्रासंगिक बताया।
इस अवसर पर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने लेखन और विचार अभिव्यक्ति के महत्व पर भी संक्षिप्त रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किताबें केवल शब्दों का संग्रह नहीं होतीं, बल्कि वे समाज को सोचने और आत्ममंथन का अवसर देती हैं। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के मंच पर हुआ यह विमोचन कार्यक्रम विचार, साहित्य और संवाद की परंपरा को और समृद्ध करता नजर आया।