Friday, 13 March 2026

स्वर्गीय शांति देवी ओझा की स्मृति में 51 लाख रुपये का सामाजिक समर्पण, सादगी और सेवा की अनुकरणीय मिसाल बने घनश्याम ओझा


स्वर्गीय शांति देवी ओझा की स्मृति में 51 लाख रुपये का सामाजिक समर्पण, सादगी और सेवा की अनुकरणीय मिसाल बने घनश्याम ओझा

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समाजसेवा, शिक्षा और मानव कल्याण के क्षेत्र में जोधपुर सारस्वत समाज से एक अत्यंत प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक पहल सामने आई है, जिसने सामाजिक परंपराओं को नई दिशा देने का कार्य किया है। पूर्व महापौर घनश्याम ओझा द्वारा अपनी दिवंगत धर्मपत्नी स्वर्गीय शांति देवी ओझा की स्मृति में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं सेवा संस्थाओं को कुल 51 लाख रुपये का समर्पण किया गया। यह पहल केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि सेवा, सादगी, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक सशक्त मिसाल है, जो समाज को दिखावे से दूर रहकर सार्थक योगदान का संदेश देती है।

स्वर्गीय शांति देवी ओझा अत्यंत सरल, करुणामयी और उच्च संस्कारों वाली महिला थीं। उनका जीवन मानव सेवा, शिक्षा और परोपकार को समर्पित रहा। वे आडंबर से दूर सादगीपूर्ण जीवन में विश्वास रखती थीं। उन्हीं जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए ओझा परिवार द्वारा उनकी पुण्य स्मृति में किया गया यह व्यापक सामाजिक समर्पण उनके विचारों को जीवंत रूप में आगे ले जाता है। यह पहल समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि श्रद्धांजलि केवल परंपराओं के निर्वाह में नहीं, बल्कि समाज के हित में किए गए कार्यों में निहित होती है।

इस अवसर पर समाजहित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के एक वार्ड को जोधपुर मानव सेवा ट्रस्ट के माध्यम से गोद लेकर उसके संपूर्ण नवीनीकरण के लिए 25 लाख रुपये समर्पित किए गए। इस राशि से अस्पताल में उपचार हेतु आने वाले जरूरतमंद मरीजों को बेहतर, स्वच्छ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह निर्णय मानवीय संवेदनाओं और सेवा भावना का सशक्त प्रतीक माना जा रहा है।

इसी क्रम में जोधपुर स्थित सारस्वत समाज भवन के विकास हेतु 15 लाख रुपये की घोषणा की गई। इस राशि से 25 टन एसी, इको सिस्टम सेटअप, वॉल पेंटिंग, माइक व्यवस्था सहित विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे, जिससे समाज भवन और अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और उपयोगी बन सके।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया गया। समाज के योग्य और होनहार विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए सारस्वत शिक्षा विकास संस्थान ट्रस्ट को 1 लाख 51 हजार रुपये की सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त लव कुश संस्थान एवं दिव्य लोक संस्थान को एक-एक लाख रुपये, बाल बसेरा संस्थान को 51 हजार रुपये, लायंस क्लब को 21 हजार रुपये तथा आई बैंक सोसाइटी को 11 हजार रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे गए। यह सहयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में समाज को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस पूरे कार्यक्रम की सबसे अनुकरणीय विशेषता यह रही कि ओझा परिवार ने सामाजिक आडंबरों से पूर्णतः दूरी बनाए रखी। स्वर्गीय शांति देवी ओझा की स्मृति में मृत्यु भोज का आयोजन नहीं किया गया। गंगा प्रसादी के अवसर पर केवल एक मिठाई बनाकर प्रसादी ग्रहण करवाई गई। वहीं पैरावनी के तौर पर केवल पगड़ी और 100 रुपये स्वीकार किए गए। ओढ़ावनी-पैरावनी जैसी रूढ़ परंपराओं को त्यागकर समाज को स्पष्ट संदेश दिया गया कि सच्ची श्रद्धांजलि दिखावे में नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना में होती है।

स्वर्गीय शांति देवी ओझा की स्मृति में किया गया यह 51 लाख रुपये का सामाजिक समर्पण समाज में सादगी, संयम, स्वच्छता और संस्कारों से जुड़ी एक नई सकारात्मक परंपरा की शुरुआत माना जा रहा है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को सेवा, त्याग और सामाजिक जिम्मेदारी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगी। इस अनुकरणीय कदम के लिए समाज के विभिन्न वर्गों ने पूरे ओझा परिवार का हृदय से अभिनंदन और आभार व्यक्त किया है तथा घनश्याम ओझा के इस निर्णय को समाज के लिए आदर्श और प्रेरक बताया है।


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