



जयपुर। प्रदेश में निर्माणाधीन और प्रस्तावित राष्ट्रीय व अंतरराज्यीय हाईवे तथा एक्सप्रेस-वे के नजदीक बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। राज्य सरकार की मंशा है कि इन प्रमुख सड़कों के दोनों ओर औद्योगिक गलियारे (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) तैयार किए जाएं, जिससे निवेश, व्यापार और रोजगार को नई गति मिल सके। इस रणनीति के तहत रीको (RIICO) ने सभी जिला कलक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे हाईवे और एक्सप्रेस-वे के आसपास उपयुक्त भूमि चिन्हित कर शीघ्र आवंटन प्रक्रिया पूरी करें।
रीको ने स्पष्ट किया है कि पहले चरण में सरकारी भूमि को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाएगा, ताकि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए तत्काल जमीन उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाई जाएगी। आगामी राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट ग्लोबल समिट में आने वाले निवेशकों के लिए भी बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता है, जिसे इन्हीं नए औद्योगिक क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जाएगा।
हाईवे पर क्यों है खास फोकस
रीको का विशेष फोकस उन हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर है, जो या तो निर्माणाधीन हैं या प्रस्तावित हैं। इन इलाकों में भूमि की उपलब्धता अपेक्षाकृत आसान होती है और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने में प्रशासनिक व तकनीकी अड़चनें भी कम आती हैं। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजनाओं की सूची भी तैयार की गई है, ताकि योजनाबद्ध तरीके से औद्योगिक विकास किया जा सके।
व्यापार और रोजगार को होगा विस्तार
इन औद्योगिक गलियारों के विकसित होने से स्थानीय उत्पादों को नया बाजार मिलेगा और व्यापार का दायरा बढ़ेगा। साथ ही रियल एस्टेट, इंडस्ट्रियल एरिया और सहायक उद्योगों का भी तेजी से विकास होगा। सबसे अहम बात यह है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से होने वाला पलायन भी रुकेगा।
प्रमुख प्रस्तावित व निर्माणाधीन हाईवे और एक्सप्रेस-वे
जयपुर–जोधपुर–पचपदरा एक्सप्रेस-वे: करीब 350 किलोमीटर लंबा, दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी।
बीकानेर–कोटपूतली एक्सप्रेस-वे: 295 किलोमीटर, हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर निर्माण।
जयपुर उत्तरी रिंग रोड: आगरा रोड, टोंक रोड, अजमेर रोड और दिल्ली मार्ग को जोड़ेगा।
जोधपुर रिंग रोड: करीब 127 किलोमीटर, जो शहर को चारों ओर से राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ेगा।
अब तक कहां मिली जमीन
दौसा–बांदीकुई क्षेत्र में यूआईटी ने 1113 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई है, जबकि भिवाड़ी में बीड़ा द्वारा भूमि उपलब्ध कराई गई है। हालांकि कई जिलों में जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में मिलने से औद्योगिक विकास में दिक्कत आ रही है। इसी कारण जिला कलक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि हाईवे के पास बड़े क्षेत्रफल में एकमुश्त भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि औद्योगिक विकास को तेज किया जा सके।
उद्योगों से मजबूत हो रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था
राजस्थान की अर्थव्यवस्था में उद्योगों का योगदान लगातार बढ़ रहा है। ग्रॉस स्टेट वैल्यू एडिशन (GSVA) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 में उद्योगों का योगदान 2.25 लाख करोड़ रुपए था, जो 2023-24 में बढ़कर 3.58 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि औद्योगिक विकास प्रदेश की आर्थिक मजबूती का प्रमुख आधार बनता जा रहा है।