



जयपुर। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट किया है कि 16 वीं विधानसभा के पंचम सत्र में सदन की कार्यप्रणाली से जुड़े किसी भी प्रकार के नए प्रावधान लागू नहीं किए गए हैं। विधायकों के लिए जारी किए गए सभी बुलेटिन पूर्व की विधानसभाओं की परंपराओं के अनुरूप ही हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, पर्ची व्यवस्था सहित सभी संसदीय प्रक्रियाएं पहले की तरह यथावत रखी गई हैं। केवल सुविधा के तौर पर प्रश्नों और पर्चियों को ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत करने का विकल्प जोड़ा गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और सुव्यवस्थित हो सके।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने बताया कि पर्ची व्यवस्था कोई नई प्रणाली नहीं है। इसकी शुरुआत वर्ष 1995 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा के निर्देश पर की गई थी, जो वर्ष 2020 तक निरंतर चलती रही। 15वीं विधानसभा के छठे सत्र में 10 फरवरी 2021 को कार्य सलाहकार समिति की बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी द्वारा इसे बंद करने का निर्णय लिया गया था। वर्तमान विधानसभा में विधायकों को अपने क्षेत्र और प्रदेश की जनसमस्याएं प्रभावी ढंग से उठाने के उद्देश्य से इस व्यवस्था को पुनः प्रारंभ किया गया है। इसके संबंध में 20 जून 2024 को विधानसभा बुलेटिन संख्या 47 जारी कर सभी सदस्यों को प्रक्रिया से अवगत कराया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि प्रश्न पूछने की प्रक्रिया में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रश्नों की संख्या और सीमा वही है, जो पहले से निर्धारित है। विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियम 37 (2) (8) और (10) के तहत यह प्रावधान पहले से मौजूद है कि प्रश्न अत्यधिक लंबे या अत्यधिक विस्तृत विषयों पर नहीं होने चाहिए, ताकि विभाग समयबद्ध और तथ्यात्मक उत्तर दे सकें। इसी नियम के आधार पर यह व्यवस्था भी पहले से लागू है कि सामान्यतः पांच वर्ष से अधिक पुरानी जानकारी न मांगी जाए और प्रश्न किसी सीमित क्षेत्र, विधानसभा क्षेत्र या तहसील तक केंद्रित हों, न कि पूरे जिले या प्रदेश पर।
‘तुच्छ विषय’ शब्द के उपयोग को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई नया शब्द नहीं है। राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के प्रथम संस्करण वर्ष 1956 से ही नियम 37 (2) (17) में स्पष्ट उल्लेख है कि तुच्छ विषयों पर प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे। यही प्रावधान लोकसभा की नियमावली (1952) तथा देश के अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी मौजूद है। इसके अलावा लोकसभा के पूर्व महासचिव महेश्वर नाथ कौल और श्याम लाल शकधर द्वारा लिखित पुस्तक ‘संसदीय पद्धति और प्रक्रिया’ में भी इसका विस्तृत उल्लेख किया गया है।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि मीडिया में प्रकाशित यह खबरें कि विधायकों पर पाबंदियां लगाई गई हैं और मंत्रियों को विशेष छूट दी गई है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। राजस्थान विधानसभा नियमों और स्वस्थ संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित होती है। सदन में विधायकों पर किसी प्रकार की कोई नई रोक नहीं लगाई गई है। सभी सदस्य पूर्ववत नियमों के तहत अपनी बात सदन में रखने के लिए स्वतंत्र हैं।