



जयपुर। प्रख्यात लेखिका और कॉलमिस्ट शोभा डे ने कहा है कि बॉलीवुड में किसी को काम धर्म या पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतिभा के आधार पर मिलता है। ऑस्कर विजेता संगीत निर्देशक ए.आर. रहमान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने साफ कहा कि वे फिल्म इंडस्ट्री में सांप्रदायिक सोच को लेकर किसी भी नकारात्मक धारणा से सहमत नहीं हैं। शोभा डे ने कहा कि रहमान जैसे कलाकारों का काम उनकी काबिलियत और रचनात्मकता का प्रमाण है, न कि उनका नाम या धार्मिक पहचान।
उन्होंने कहा कि उन्हें अगली पीढ़ी से बहुत उम्मीदें हैं। महिलाओं में अपार सहनशक्ति और क्षमता होती है, जिसे कमजोरी नहीं बल्कि ताकत के रूप में अपनाने की जरूरत है। महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए और समाज को भी उनकी क्षमताओं को पहचानना चाहिए।
ए.आर. रहमान ने हाल ही में फिल्म रामायण के लिए संगीत तैयार करने को लेकर कहा था कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और आदर्शों की कहानी है। ज्ञान और संवेदनाएं धर्म से परे होती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि इस प्रोजेक्ट को लेकर उनके मुस्लिम नाम की वजह से उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
शोभा डे ने मीडिया से बातचीत के दौरान ईरान में महिलाओं और निर्दोष लोगों के साथ हो रहे अत्याचारों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है, वह बेहद गलत है और इसे देखकर कोई भी संवेदनशील इंसान आंखें बंद नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि यह हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम इसके खिलाफ आवाज उठाएं। शोभा डे ने स्पष्ट किया कि वे यह बात किसी सरकार या भू-राजनीति से जुड़कर नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर कह रही हैं।
उन्होंने कहा कि वे एक हिंदू महिला हैं और अर्द्धनारीश्वर की अवधारणा में विश्वास रखती हैं, जहां स्त्री और पुरुष ऊर्जा का संतुलन ही सृष्टि का आधार है। दुनिया में फेमिनिन और मस्क्यूलिन ऊर्जा दोनों आवश्यक हैं और किसी एक को दबाया जाना अस्वीकार्य है।
शोभा डे ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा ही वह माध्यम है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि उनकी मां के दौर से लेकर आज तक समाज में बहुत बदलाव आया है। आज महिलाएं फ्लाइंग कमांडर से लेकर सेना और हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिले हैं और अब समय है कि इन अधिकारों का पूरा उपयोग करते हुए महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आएं।