



जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शतरंज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि वे एआई से सीधे जवाब नहीं खोजते, क्योंकि एआई आसानी से उत्तर दे सकता है, लेकिन किसी भी समझदार इंसान के जवाब के पीछे का तर्क और लॉजिक समझना ज्यादा जरूरी होता है। आनंद ने कहा कि एआई के जवाबों को समझते-समझते ही थकान हो जाती है, इसलिए हर समस्या का समाधान मशीन पर छोड़ना सही नहीं है।
‘लाइटनिंग किड’ सत्र में विश्वनाथन आनंद ने शतरंज के सफर, अपने स्वभाव, गुस्से और सोच पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि हार से घबराने के बजाय निरंतर अभ्यास को प्राथमिकता देना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भी कई मुकाबले हारे, लेकिन हार पर ध्यान देने के बजाय अभ्यास जारी रखा, जिससे आगे सफलता मिली।
चारबाग में आयोजित बच्चों के विशेष सत्र में आनंद ने कहा कि नियमित अभ्यास किसी भी क्षेत्र में सफलता की कुंजी है। उन्होंने बताया कि जब वे लगातार तीन मुकाबले हार गए थे, तब उन्होंने निराश होने के बजाय अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों के करियर को आकार देने में माता-पिता की भूमिका बेहद अहम होती है। उनके जीवन में शतरंज उनकी मां के कारण आया, जो उन्हें हर टूर्नामेंट में लेकर जाती थीं।
फेस्टिवल के एक अन्य सत्र ‘टू चीयर्स फॉर डेमोक्रेसी’ में अमेरिका में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई। लेखिका रूही तिवारी ने कहा कि अमेरिका में अब तक महिला राष्ट्रपति न बनने पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार डोनाल्ड ट्रम्प लोकतंत्र के लिए जेंडर के सवाल से भी कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हुए हैं।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत मॉर्निंग म्यूजिक सत्र में लोक गायिका भंवरी देवी की प्रभावशाली प्रस्तुति से हुई। वहीं, फ्रंट लॉन में आयोजित ‘असेंबलिंग इंडिया का संविधान’ सत्र में कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर उपस्थित नहीं हो सके, जबकि उनका नाम वक्ताओं की सूची में शामिल था।
विश्वनाथन आनंद के विचारों और अनुभवों ने खासकर युवाओं और बच्चों को प्रेरित किया, वहीं एआई और लोकतंत्र जैसे समकालीन विषयों पर हुई चर्चाओं ने फेस्टिवल को और अधिक विचारोत्तेजक बना दिया।