Thursday, 15 January 2026

पंचायत भवन के लिए अवैध रूप से पेड़ कटाई पर हाईकोर्ट सख्त: तत्कालीन एसडीएम सहित दोषी अधिकारियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना


पंचायत भवन के लिए अवैध रूप से पेड़ कटाई पर हाईकोर्ट सख्त: तत्कालीन एसडीएम सहित दोषी अधिकारियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। पंचायत भवन निर्माण के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना और अनुमत संख्या से कहीं अधिक पेड़ काटे जाने को राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर मामला माना है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में तत्कालीन दौसा जिले के सिकराय उपखंड अधिकारी (एसडीएम) सहित अन्य दोषी अधिकारियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह आदेश विमला देवी द्वारा दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए पारित किए और निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि पेड़ों की कटाई में शामिल अधिकारियों से ही वसूली जाए।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक उपयोग के लिए भवन निर्माण आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसके साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। न्यायालय ने कहा कि भवन निर्माण की योजना इस प्रकार बनाई जानी चाहिए कि मौजूदा वृक्षों को नुकसान न पहुंचे और पर्यावरण की रक्षा सुनिश्चित हो।

25 की अनुमति, 150 से ज्यादा पेड़ काटे

जनहित याचिका में बताया गया था कि ग्राम पंचायत पाटन के भवन निर्माण के लिए तत्कालीन एसडीएम ने बिना अधिकार के पेड़ काटने की अनुमति दे दी। अनुमति केवल 17 बड़े व मध्यम और 8 छोटे पेड़ों यानी कुल 25 पेड़ों की थी, लेकिन इसके विपरीत प्रशासन द्वारा 150 से अधिक पेड़ काट दिए गए। यह कटाई नियमों और अनुमति की शर्तों का खुला उल्लंघन थी।

सरकार की ओर से दलील दी गई कि पंचायत भवन निर्माण के बदले अन्य स्थान पर भूमि चिह्नित कर करीब 500 पौधे लगाए गए हैं। इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति पेड़ काटना अवैध है और बाद में पौधारोपण करना, बड़े पैमाने पर वृक्ष कटाई को सही नहीं ठहरा सकता।

जिम्मेदार अधिकारियों पर हो अनुशासनात्मक कार्रवाई

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंधित क्षेत्र घने वन वृक्षों से भरा हुआ था, जिन्हें अवैध रूप से काटा गया। ऐसे मामलों में न केवल अवैध आदेश देने वाले अधिकारी, बल्कि उस आदेश की पालना करने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए थी।

जुर्माना राशि पौधों के संरक्षण में खर्च होगी

हाईकोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि जनहित याचिका दायर होने के बाद वर्तमान एसडीएम द्वारा नए पौधे लगाए गए, जो अब बड़े हो चुके हैं। न्यायालय ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए निर्देश दिए कि इन पौधों की नियमित निगरानी की जाए, उन्हें भविष्य में मजबूत वृक्षों के रूप में विकसित किया जाए और उनकी सुरक्षा के लिए वृक्ष रक्षक तैनात किए जाएं। साथ ही, अधिकारियों से वसूली गई जुर्माना राशि इन्हीं पौधों के रखरखाव और संरक्षण में उपयोग की जाए।

Previous
Next

Related Posts