



जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अंतर्गत अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के बागान वेन्यू में साहित्यिक संवाद सत्र “पोएट्री – खुद से बात” का आयोजन किया गया। इस सत्र में कवि एवं पीआर विशेषज्ञ जगदीप सिंह ने लेखिका, कवयित्री और प्रकाशक अंशु हर्ष से उनके साहित्यिक सफ़र, लेखन प्रक्रिया और रचनात्मक अनुभवों पर आत्मीय बातचीत की। इसी अवसर पर अंशु हर्ष के पहले नॉवल “इच्छा मृत्यु” का लोकार्पण भी किया गया। इस उपन्यास को प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। पुस्तक का विमोचन वरिष्ठ लेखिका एवं अनुवादक माला श्री लाल द्वारा किया।
संवाद के दौरान जगदीप सिंह ने अंशु हर्ष से कविता से नॉवल तक की उनकी रचनात्मक यात्रा पर सवाल किए। इस पर अंशु हर्ष ने कहा कि कविता भावनाओं की तात्कालिक अभिव्यक्ति होती है, जबकि नॉवल एक लंबी और गहन प्रक्रिया है, जिसमें लेखक को पात्रों के साथ जीना पड़ता है। उन्होंने बताया कि “इच्छा मृत्यु” जीवन और मृत्यु के बीच के संघर्ष की कहानी है, जो पाठकों को भीतर तक सोचने के लिए प्रेरित करती है।
अपनी पुस्तक “समंदर – दी ओशन” में कविताओं के अंग्रेज़ी अनुवाद के अनुभव साझा करते हुए अंशु हर्ष ने कहा कि अनुवाद साहित्य को भाषाई सीमाओं से बाहर ले जाता है और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सेतु का कार्य करता है। सही अनुवाद मूल भावनाओं को सुरक्षित रखते हुए रचना को नए पाठकों तक पहुंचाता है।
वर्ष 2013 में प्रकाशित अपनी पहली पुस्तक से अब तक के सफ़र को याद करते हुए उन्होंने कहा कि समय और अनुभव ने उनके लेखन को अधिक परिपक्व बनाया है। पहले उनका लेखन अधिक व्यक्तिगत था, जबकि अब उसमें सामाजिक सरोकार और मानवीय दृष्टि अधिक गहराई से शामिल हो गई है।
“कविता लिखना खुद से बात करना होता है” — इस कथन को स्पष्ट करते हुए अंशु हर्ष ने कहा कि कविता आत्मसंवाद का माध्यम है। जब कवि लिखता है, तो वह अपने भीतर की सच्चाइयों से रूबरू होता है। अपनी बात कहने का साहस ही कविता की सबसे बड़ी ताकत है, यही कारण है कि कविता लेखक और पाठक—दोनों के लिए एक गहन संवेदनात्मक अनुभव बन जाती है।