Saturday, 29 August 2026

पंचायत–निकाय चुनाव से पहले बड़ा बदलाव: तीन संतान पर भी चुनाव लड़ने की मिलेगी पात्रता, विधेयक ड्राफ्ट अंतिम चरण में


पंचायत–निकाय चुनाव से पहले बड़ा बदलाव: तीन संतान पर भी चुनाव लड़ने की मिलेगी पात्रता, विधेयक ड्राफ्ट अंतिम चरण में

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के आगामी बजट सत्र को लेकर सरकार ने विधायी तैयारियां तेज कर दी हैं। पंचायत और निकाय चुनावों से पहले दो संतान बाध्यता से जुड़े करीब 30 साल पुराने कानून में संशोधन के लिए विधेयक का ड्राफ्ट अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। प्रस्तावित संशोधन के बाद तीन संतान होने पर भी चुनाव लड़ने की पात्रता मान्य होगी। सरकार इसके साथ-साथ दो अन्य अध्यादेशों के स्थान पर विधेयक लाने की तैयारी भी कर रही है। इन चारों विधेयकों को आगामी बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा।

पहले 1994 के पंचायती राज अधिनियम और 2009 के नगरपालिका अधिनियम में अध्यादेश के जरिए संशोधन की योजना थी, लेकिन अध्यादेश जारी नहीं किया गया। अब इनके स्थान पर विधेयक लाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पंचायती राज विभाग और नगरीय विकास विभाग ने अपने-अपने विधेयकों के ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज दिए हैं, जहां इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है।

अध्यादेशों के स्थान पर आने वाले प्रमुख विधेयक

  1. राजस्थान जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश–2025
    वन अधिनियम और काश्तकारी अधिनियम सहित छोटे अपराधों में मुकदमे के बजाय जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। यह केंद्र की तर्ज पर जन विश्वास कानून लागू करने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसे अब विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।

  2. राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश–2025
    श्रम कानूनों में संशोधन के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में काम करने की अनुमति नहीं होगी। प्रशिक्षु बनने की न्यूनतम आयु 12 से बढ़ाकर 14 वर्ष कर दी गई है। स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए 14–18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों से रात में काम नहीं कराया जा सकेगा। दैनिक कार्य अवधि 9 से बढ़ाकर 10 घंटे तथा तिमाही ओवरटाइम सीमा 126 से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है।

अब तक लागू रही पाबंदी क्या थी?

वर्तमान प्रावधानों के अनुसार 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरा बच्चा होने पर पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, संभापति और महापौर का चुनाव लड़ने की अयोग्यता थी। गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ने पर पद समाप्त होने के साथ जेल का प्रावधान भी था। यह व्यवस्था राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 तथा पंचायती राज अधिनियम में लागू है। उल्लेखनीय है कि कई राज्य इस तरह की बाध्यता को पहले ही समाप्त कर चुके हैं। प्रस्तावित संशोधन से राजस्थान में भी इस पाबंदी के हटने का रास्ता साफ हो सकता है।

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