Saturday, 29 August 2026

शहरी सीमा में शामिल गांवों की कृषि भूमि कन्वर्जन पर बड़ा फैसला, अब नगरीय निकाय करेंगे प्रक्रिया


शहरी सीमा में शामिल गांवों की कृषि भूमि कन्वर्जन पर बड़ा फैसला, अब नगरीय निकाय करेंगे प्रक्रिया

जयपुर। पिछले वर्ष मार्च माह में जिन राजस्व गांवों को शहरी सीमा (नगरीय निकाय क्षेत्र) में शामिल किया गया था, उनकी कृषि भूमि (एग्रीकल्चर लैंड) के कन्वर्जन को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस संबंध में राजस्व विभाग, नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुखों द्वारा एक संयुक्त आदेश (ज्वाइंट सर्कुलर) जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, अब 18 मार्च 2025 को शहरी सीमा में शामिल किए गए गांवों की जमीनों का कन्वर्जन संबंधित नगरीय निकायों के माध्यम से ही किया जाएगा।

राजस्व विभाग की ओर से जारी सर्कुलर में बताया गया है कि 18 मार्च 2025 को प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों के राजस्व गांवों को शहरी सीमा में शामिल किया गया था। इसके बाद इन गांवों की कृषि भूमि के कन्वर्जन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि यह अधिकार जिला प्रशासन के पास रहेगा या स्थानीय नगरीय निकायों के अधीन होगा। अब सरकार ने संयुक्त परिपत्र जारी कर इस भ्रम को समाप्त कर दिया है और कन्वर्जन प्रक्रिया की स्पष्ट रूपरेखा तय कर दी है।

18 मार्च 2025 से पहले आए मामलों पर जिला प्रशासन करेगा कार्रवाई

संयुक्त आदेश के अनुसार, यदि 18 मार्च 2025 से पहले किसी राजस्व गांव की भूमि का कन्वर्जन आवेदन जिला प्रशासन स्तर (कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम या तहसीलदार) पर प्रस्तुत हो चुका है और उस पर कार्यवाही करते हुए मांग राशि आधी या पूरी जमा कर दी गई है, तो ऐसे प्रकरणों में आगे की पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन द्वारा ही पूरी की जाएगी। हालांकि, इन मामलों में आगे की कार्यवाही के दौरान बिल्डिंग बायलॉज और टाउनशिप पॉलिसी से जुड़े नियम नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी नवीन नियमों के अनुसार ही लागू होंगे।

मांग राशि जारी नहीं हुई तो आवेदन होगा निरस्त

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 18 मार्च 2025 से पहले आवेदन तो जिला प्रशासन के पास आ गया था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई और मांग राशि जारी नहीं की गई, तो ऐसे सभी आवेदन निरस्त माने जाएंगे। ऐसे मामलों में आवेदकों को नए सिरे से संबंधित क्षेत्र की नगरीय निकाय—नगर पालिका, यूआईटी या विकास प्राधिकरण—में आवेदन करना होगा।

सरकार के इस फैसले से शहरी सीमा में शामिल गांवों में भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है। साथ ही, नगरीय नियोजन, भवन निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विकास में भी एकरूपता आएगी। प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टता को खत्म करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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