



जयपुर। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि अगर दुनिया को खनिज उत्पादन तेजी से बढ़ाना है, तो इसका सबसे व्यावहारिक और प्रभावी तरीका केवल एक ही है—मौजूदा खदानों (माइंस) के उत्पादन को बढ़ाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई माइंस विकसित करने में वर्षों लग जाते हैं, जबकि पहले से मौजूद माइंस की क्षमता बढ़ाकर कम समय में उत्पादन में बड़ा इजाफा किया जा सकता है।
वेदांता समूह के चेयरमैनअनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत में सोने और तांबे की खदानों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन या तो वे कम उत्पादन कर रही हैं या पूरी तरह बंद पड़ी हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए बताया कि भारत अपनी जरूरत का 99.9 प्रतिशत सोना और करीब 95 प्रतिशत तांबा आयात करता है, जो देश की आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बड़ी कमजोरी है। उनका कहना है कि खनिज संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद भारत का आयात पर इतनी अधिक निर्भरता होना गंभीर विषय है।
वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा समय में जब वैश्विक स्तर पर सोने और तांबे की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, तब भारत सरकार को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) को प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि देश की अधिकांश माइंस सरकारी नियंत्रण में हैं और संसाधनों के बावजूद उनका पूरा दोहन नहीं हो पा रहा है।
वेदांता समूह के चेयरमैनअनिल अग्रवाल ने यह भी कहा कि खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार को कुछ हद तक जोखिम उठाना होगा। यदि सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर नीति और नियमन में लचीलापन दिखाए, तो न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी। इससे रोजगार सृजन, राजस्व में वृद्धि और भारत को खनिज आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के पास संसाधनों की कमी नहीं है, कमी है तो केवल निर्णायक नीति और साहसिक फैसलों की। सही समय पर लिए गए कदम भारत को वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिला सकते हैं।