



राज्य सरकार नए साल की शुरुआत में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करने जा रही है। 36 से अधिक जिलों में कलेक्टर और एसपी बदले जाने की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार 20 से अधिक जिलों के कलेक्टर और 16 से ज्यादा जिलों के पुलिस अधीक्षक सरकार के राडार पर हैं। प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों ने इन अधिकारियों के कार्य, समन्वय और जनप्रतिनिधियों से संबंधों को लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि 20 से अधिक जिलों में कलेक्टर या एसपी का स्थानीय विधायक अथवा मंत्री से टकराव हो चुका है, जिसकी शिकायतें सीधे मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं। इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर जिलों में फेरबदल किया जाएगा।
इससे पहले 10 और 11 जनवरी को जयपुर में सरकार की पहली कलक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी। यह कॉन्फ्रेंस पहले 13 और 14 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे, त्योहारी व्यस्तता और प्रशासनिक कारणों से स्थगित कर दी गई थी। अब सरकार गठन के लगभग 25 महीने बाद पहली बार यह अहम कॉन्फ्रेंस होने जा रही है। इसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कलक्टरों और एसपी को अगले दो वर्षों के लक्ष्य सौंपेंगे और सरकार का रोडमैप स्पष्ट करेंगे।
कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति, मुख्यमंत्री की घोषणाओं की जमीनी स्थिति, कानून-व्यवस्था और सुशासन पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी। प्रशासनिक सुधार विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को तैयारी के निर्देश जारी कर दिए हैं।
मुख्य एजेंडा – विजन डॉक्यूमेंट 2047 और अरावली:
इस कॉन्फ्रेंस का प्रमुख एजेंडा सरकार का विजन डॉक्यूमेंट 2047 होगा। हर विभाग द्वारा तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट के आधार पर जिलों में किए जाने वाले कार्यों का प्रेजेंटेशन होगा। इसके साथ ही अरावली क्षेत्र में अवैध खनन, पर्यावरण संरक्षण और इससे जुड़े मामलों पर सीएमओ और मुख्य सचिव स्तर से भेजे गए निर्देशों की पालना की समीक्षा की जाएगी। सभी कलेक्टरों से पेंडेंसी और प्रगति रिपोर्ट मांगी जाएगी।
लंबे समय से जमे अधिकारी भी राडार पर:
प्रदेश के 41 जिलों में से 26 जिलों के कलेक्टर ऐसे हैं, जो 18 महीने या उससे अधिक समय से एक ही जिले में पदस्थ हैं। केवल 8 कलेक्टर ऐसे हैं, जिन्हें पिछले 9 महीनों में नई पोस्टिंग मिली है। इसी तरह 18 जिलों के एसपी भी 18 महीने से अधिक समय से एक ही जिले में तैनात हैं, जिनमें से कुछ तो पिछली सरकार के समय से ही एक ही स्थान पर जमे हुए हैं।
सचिवालय से भी होंगे तबादले:
सिर्फ जिलों में ही नहीं, बल्कि सचिवालय में लंबे समय से जमे अधिकारियों की भी स्क्रूटनी की गई है। उनकी एक अलग सूची तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर जनवरी-फरवरी में तबादले किए जा सकते हैं। सरकार का फोकस प्रशासनिक संतुलन, बेहतर समन्वय और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहेगा।