Saturday, 29 August 2026

भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा को मिला संसद का सहारा: डॉ. सुनीता दुबे के नेतृत्व में ‘MP Forum for Healthcare Safety’ की ऐतिहासिक शुरुआत


भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा को मिला संसद का सहारा: डॉ. सुनीता दुबे के नेतृत्व में ‘MP Forum for Healthcare Safety’ की ऐतिहासिक शुरुआत

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा, डॉक्टरों की गरिमा और उनके कानूनी संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। MedscapeIndia – Aryan Medical Educational Trust (AMET) की पहल पर MP Forum for Healthcare Safety & Protection (MP-HSP Forum) की औपचारिक शुरुआत नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में की गई। यह ऐसा पहला मंच है, जिसमें देश के सांसद एक संरचित संसदीय तंत्र के माध्यम से भारत की संपूर्ण चिकित्सा बिरादरी की सामूहिक आवाज बनेंगे।

फोरम के लॉन्च में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद, वरिष्ठ चिकित्सक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम की प्रमुख हस्तियों में डॉ. भागवत कराड़, डॉ. फौज़िया खान और प्रसिद्ध रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता दुबे शामिल रहीं, जिन्होंने इस अभियान में निरंतर नेतृत्व प्रदान किया है। यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र और संसद के बीच अभूतपूर्व एकता और समन्वय का प्रतीक मानी जा रही है।

इससे पहले सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को राज्यसभा में उठाया था और स्वास्थ्य मंत्रालय को औपचारिक रूप से पत्र भी भेजा था। उनकी पहल और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से यह अभियान और अधिक प्रभावी बना, जिसने डॉक्टरों की सुरक्षा को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया।

वकालत से लेकर संसदीय स्वामित्व तक का सफर

पिछले कई वर्षों से डॉक्टरों पर हो रही हिंसा, उत्पीड़न और असुरक्षा का मुद्दा संसद में 16 बार उठाया जा चुका है। अब तक 42 से अधिक सांसद इस मुद्दे पर अपना समर्थन दे चुके हैं। इतना ही नहीं, इस विषय पर देश की राष्ट्रपति द्वारा भी संज्ञान लिया जा चुका है, जो इसकी राष्ट्रीय महत्ता को दर्शाता है।

लोकसभा, राज्यसभा, संसदीय समितियों, मंत्रालयों, याचिकाओं और विशेषज्ञ चर्चाओं में बार-बार यह मुद्दा सामने आने पर देश भर के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस समाधान की आवश्यकता महसूस की गई। इस रास्ते को आगे बढ़ाने में MedscapeIndia और उसकी संस्थापक डॉ. सुनीता दुबे की तीन वर्षों से लगातार की गई राष्ट्रीय स्तर की वकालत और अभियान का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

तीन वर्षों की मेहनत का परिणाम—एक मजबूत संस्थागत समाधान

इस दिशा में वर्षों से चल रहे प्रयासों में शामिल हैं—

  • व्यापक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा कानून की मांग, जिसमें विशेष स्वास्थ्य न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) शामिल हों।

  • सांसदों द्वारा Healthcare Safety Bill का प्रस्तुतिकरण।

  • डॉक्टरों की सुरक्षा और जन-जागरूकता के लिए लगातार राष्ट्रीय नेतृत्व और जनसंवाद।

नया MP-HSP Forum अब इन सभी प्रयासों को एक स्थायी और जवाबदेह संसदीय ढांचे में परिवर्तित करेगा।

देशभर के प्रमुख डॉक्टरों ने जताया समर्थन

फोरम की लॉन्चिंग में कई वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे—

  • डॉ. गिरीश त्यागी (DMC)

  • डॉ. मोशिन वली

  • डॉ. अनिल कोहली

  • डॉ. पुनीत अग्रवाल (NMO)

  • डॉ. देवेंद्र त्रिगुणा

  • ब्रिगेडियर आर. आर. सिंह

  • डॉ. रवि राठौड़

  • वरुण जोशी

उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि यह केवल किसी संस्था का कार्यक्रम नहीं, बल्कि संपूर्ण मेडिकल समुदाय की एकजुट आवाज बन चुका है। सभी विशेषज्ञों ने कहा कि डॉक्टरों पर बढ़ती हिंसा अब व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट है।

MedscapeIndia-AMET: एक राष्ट्रीय चिकित्सा आवाज

MedscapeIndia प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर की 8,000 संस्थाओं और 57 राष्ट्रीय चिकित्सा संगठनों को एक मंच पर जोड़ा गया है। यह मंच सरकार, नीति निर्माताओं और डॉक्टरों के बीच एक औपचारिक, प्रभावी और नीति-आधारित संवाद स्थापित करता है। फोरम को 42 सांसदों का प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है, जो इसके उद्देश्य की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

MP-HSP Forum: जब सांसद बनेंगे डॉक्टरों की आवाज

यह मंच डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और संरक्षण को संसद की प्राथमिकता बनाने के उद्देश्य से गठित किया गया है। इससे—

  • स्वास्थ्य सुरक्षा कानूनों पर तेजी से काम होगा।

  • सबूत-आधारित संसदीय हस्तक्षेप होंगे।

  • संबंधित मंत्रालयों के साथ निरंतर संवाद संभव होगा।

  • समयबद्ध नीतियों और कानूनों का मार्ग प्रशस्त होगा।

यह संरचना उन मांगों को संसदीय स्वरूप देती है जो वर्षों से केवल वकालत और चर्चाओं तक सीमित थीं।

एक परिपक्व, समाधान-केंद्रित राष्ट्रीय पहल

यह पहल किसी विरोध आंदोलन का मंच नहीं, बल्कि नीति-आधारित, संवाद-प्रधान और सहयोग-केंद्रित राष्ट्रीय कार्यक्रम है। 2003 से चल रही वकालत को अब संसद के सहयोग से एक संगठित ढांचा मिल गया है। 2024 से डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए राष्ट्रीय रेड फ्लैग अभियान भी चल रहा है, जो अब वैश्विक स्तर पर गति पकड़ रहा है।

फोरम का शुभारंभ भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण है—जब संसद स्वयं उन लोगों के साथ खड़ी है, जो देश के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं। जब सांसद डॉक्टरों की आवाज बनते हैं, तब समाधान तेज़ होते हैं, नीतियां मजबूत होती हैं और राष्ट्रीय संकल्प राष्ट्रीय कार्रवाई में परिवर्तित होता है।

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