Saturday, 29 August 2026

अजमेर: ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स की रस्मों की शुरुआत 17 दिसंबर को झंडे की परंपरागत अदायगी से होगी


अजमेर: ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स की रस्मों की शुरुआत 17 दिसंबर को झंडे की परंपरागत अदायगी से होगी
File Photo

अजमेर। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 812वें सालाना उर्स की अनौपचारिक शुरुआत 17 दिसंबर को होगी। इस दिन दरगाह की सबसे ऊंची इमारत बुलंद दरवाजा पर परंपरागत झंडे की रस्म अदा की जाएगी। भीलवाड़ा का गौरी परिवार, जो वर्षों से यह सम्मान निभाता आ रहा है, झंडा लेकर दरगाह पहुंच चुका है। झंडे की रस्म के साथ ही देश-दुनिया से आने वाले जायरीन का अजमेर आना तेज हो जाएगा।

दरगाह खादिम सैयद कुतुबुद्दीन सकी ने बताया कि झंडा रस्म उर्स नजदीक होने की सूचना देने का प्रतीक है। इस रस्म में हजारों जायरीन शामिल होते हैं।

20 दिसंबर: मजार से उतारा जाएगा पवित्र संदल

सकी ने बताया कि 20 दिसंबर की रात 8 बजे मजार से संदल उतारने की रस्म होगी। यह उर्स पूर्व की सबसे अहम रस्म मानी जाती है। वर्षभर मजार पर चढ़ा चंदन, इत्र और केवड़ा खादिम आपस में बांटते हैं तथा कुछ हिस्सा जायरीन को भी दिया जाता है। मान्यता है कि यह संदल पानी में मिलाकर पीने से बीमारियों में राहत मिलती है।

21 दिसंबर: जन्नती दरवाजा होगा आम लोगों के लिए खुला

दरगाह का प्रसिद्ध जन्नती दरवाजा, जो वर्ष में सिर्फ चार बार खुलता है, उर्स के साथ ही खुलेगा। यदि 21 दिसंबर की रात रजब का चांद नहीं दिखा, तो इसे अगले दिन खोला जाएगा। मान्यता है कि इस दरवाजे से होकर मजार की जियारत करने पर जन्नत नसीब होती है, इसलिए जायरीन में विशेष उत्साह रहता है।

मलंगों का जुलूस और हैरतअंगेज करतब

देशभर से मलंग छड़ी लेकर महरौली में जुटते हैं और पैदल अजमेर की ओर बढ़ते हैं। चांद रात को वे जुलूस के रूप में दरगाह पहुंचकर छड़ी पेश करते हैं। रास्ते में वे अपने पारंपरिक करतबों से लोगों को आकर्षित करते हैं।

चांद रात से शुरू होंगी सूफियाना महफिलें

उर्स में कव्वालियों का सिलसिला जोर पकड़ लेता है। महफिल खाने में शाही कव्वाल सूफी कलाम पेश करेंगे। दरगाह परिसर और खादिमों के हुजरे भी कव्वालियों से गूंज उठेंगे। सकी ने बताया कि उनके हुजरे पर 27, 28 और 29 दिसंबर को कव्वालियां होंगी।

खिदमत का बदलेगा समय

उर्स की शुरुआत के साथ ही खिदमत का समय बदल जाएगा। अब यह रात में आयोजित होगी। देर रात मजार शरीफ को गुस्ल भी दिया जाएगा। उर्स की छठी की रस्म 27 या 28 दिसंबर को होगी, जो चांद दिखने पर निर्भर करती है।

रोशनी की दुआ और चादरपोशी

उर्स में ‘रोशनी की दुआ’ आस्ताने के बाहर अदा की जाएगी। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री तथा बॉलीवुड से जुड़े कलाकारों सहित कई हस्तियां दरगाह में चादर पेश करेंगी। 22 दिसंबर को बॉलीवुड की ओर से विशेष चादर पोशी होगी।

30 दिसंबर: बड़े कल की अंतिम रस्म

उर्स की समापन रस्म ‘बड़ा कल’ 30 दिसंबर को अदा की जाएगी। खादिम एक-दूसरे को जियारत करवाएंगे, दस्तारबंदी करेंगे और देश में अमन, चैन व भाईचारे की दुआ करेंगे।

    Previous
    Next

    Related Posts