



जयपुर। राजभवन के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को जवाहर कला केंद्र में आयोजित जयपुर टाइगर फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ करते हुए कहा कि “देश के जंगल इसलिए बचे हैं क्योंकि बाघ अभ्यारण्य बचे हुए हैं।” उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि बाघों के साथ-साथ जल, जंगल और ज़मीन के संरक्षण में भी संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास किए जाएं। राज्यपाल ने कहा कि बाघ एक अंब्रेला स्पीशीज है—जब तक बाघ सुरक्षित हैं, तब तक वन्यजीव, वन और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेंगे।
राज्यपाल बागडे ने राजस्थान की गौरवशाली वीर परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्रकृति संरक्षण की लोक परंपराएं सदियों से जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि बप्पा रावल जैसे पराक्रमी योद्धाओं की विरासत के साथ-साथ राजस्थान बाघ संरक्षण में भी अग्रणी है। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 160 बाघ हैं, जिनमें से 144 जंगलों में तथा 16 कैप्टिविटी में हैं। अकेले रणथंभौर में 71 बाघ हैं, जो राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाते हैं।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि बाघों के प्राकृतिक आवास बढ़ती मानव आबादी और भू-उपयोग में परिवर्तन के कारण संकुचित हो रहे हैं, इसलिए संरक्षण अब केवल सरकार का नहीं, समाज का साझा दायित्व बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरता, स्वच्छ जल और जैव विविधता—all बाघों की उपस्थिति पर निर्भर करते हैं।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने टाइगर फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित वन्यजीव एवं बाघ संरक्षण से जुड़ी फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा संरक्षण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशेषज्ञों एवं संरक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने आग्रह किया कि पर्यटन को इस प्रकार विकसित किया जाए कि वन्यजीवों को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे और वनवासियों के जीवन में भी संतुलन बना रहे।
इस अवसर पर राज्यपाल बागडे ने कहा कि राजस्थान केवल शक्ति और भक्ति की भूमि ही नहीं है, बल्कि गोपालन का सबसे बड़ा केंद्र भी है। दुग्ध उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है, जो यहां की पशुधन संवर्धन परंपरा को दर्शाता है।
राज्यपाल बागडे के संबोधन ने यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा, बाघों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में सरकार, समाज और वन्यजीव विशेषज्ञों को संयुक्त रूप से आगे बढ़ना होगा।