



हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध के दौरान हुई हिंसा पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे प्रायोजित और सुनियोजित घटना करार दिया है। गुरुवार को घटना पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा और जोगाराम पटेल ने कहा कि यह वास्तविक किसानों का आंदोलन नहीं था, बल्कि बाहर से लाए गए लोगों द्वारा आंदोलन की आड़ में उपद्रव करवाया गया।
मंत्रियों ने कहा कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि राजस्थान से बाहर के लगभग एक हजार लोग हिंसा भड़काने के लिए एथेनॉल फैक्ट्री के पास पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा वार्ता के लिए तैयार है और कानून सम्मत मांगों पर विचार करेगी, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई तो सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि जिस एथेनॉल फैक्ट्री का आज कांग्रेस विरोध कर रही है, उसका एमओयू वर्ष 2022 में कांग्रेस सरकार के समय हुआ था, और वर्ष 2023 में लैंड कन्वर्ज़न भी उसी सरकार में स्वीकृत हुआ था। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के वर्तमान विरोध को लेकर मंत्री गोदारा ने सवाल उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा स्पष्ट करें कि उनके अपने नेता ही उनके शासनकाल में लिए गए निर्णय का विरोध क्यों कर रहे हैं।
गोदारा ने कहा कि यह फैक्ट्री उस क्षेत्र के लिए लाभकारी है। इससे स्थानीय किसानों और श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का और कृषि अपशिष्ट किसानों से खरीदा जाएगा। पशुओं के लिए कैटल फीड भी तैयार होगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और वामपंथी समूह क्षेत्र का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं।