



राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ा अपडेट सामने आया है। जलदाय विभाग के टेंडर में कथित फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में राज्य सरकार ने तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल सहित 6 अधिकारियों के खिलाफ एसीबी जांच की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इन अधिकारियों में भाजपा विधायक देवी सिंह शेखावत के भाई गोपाल सिंह का नाम भी शामिल है।
भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम धारा 17-ए में जांच की अनुमति मुख्यमंत्री स्तर से जारी की गई है। इससे पहले 12 अधिकारियों के खिलाफ जांच की मंजूरी दी गई थी, अब कुल 18 अधिकारी जांच के दायरे में आ गए हैं।
एसीबी और ईडी पहले से ही इस मामले में जांच कर रहे हैं। दोनों एजेंसियों का दावा है कि यह करीब 900 करोड़ रुपए का घोटाला है। इसी केस में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी हुई थी। जोशी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर आए हैं।
जांच एजेंसी ने कुल 8 अधिकारियों के खिलाफ 17-ए में जांच की अनुमति मांगी थी, लेकिन लगभग एक साल बाद केवल 6 अफसरों पर ही जांच की सहमति मिली है।
इनमें शामिल हैं—
सुबोध अग्रवाल, तत्कालीन ACS, जलदाय विभाग
गोपाल सिंह शेखावत, तत्कालीन उपसचिव
दलीप गौड़, चीफ इंजीनियर (रिटायर्ड)
केसी कुमावत, फाइनेंस एडवाइजर
मुकेश गोयल, अधीक्षण अभियंता (SE)
केडी गुप्ता, चीफ इंजीनियर
जिन अफसरों पर अनुमति नहीं मिली, उनमें सुधांशु दीक्षित (ACE) और संजय अग्रवाल (XEN) शामिल बताए जाते हैं।
सुबोध अग्रवाल 2023 में जलदाय विभाग में एसीएस रहे और वर्तमान में RFC के CMD हैं। वे इसी माह रिटायर होने वाले हैं। वहीं गोपाल सिंह 2022-23 में जलदाय विभाग में उपसचिव रहे और अब हाउसिंग बोर्ड के सचिव हैं।
ईडी ने इस घोटाले में ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत का खुलासा करते हुए पदमचंद जैन,महेश मित्तल,पीयूष जैन,संजय बड़ाया को भी गिरफ्तार किया था। बाद में सभी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, श्याम ट्यूबवेल कंपनी और गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने इरकॉन के फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र बनवाकर बड़े टेंडर हासिल किए और अवैध रूप से करोड़ों रुपए की कमाई की।
एक अन्य केस में एक रिटायर्ड IAS अधिकारी के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा नियम 1969 के तहत नवीन जांच की अनुमति दी गई है। साथ ही 5 अधिकारियों की रिव्यू याचिका खारिज कर पहले वाली सजा बरकरार रखी गई है, जबकि 2 रिटायर्ड अधिकारियों पर CCA नियम 16 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
ग्रामीण इलाकों में DI Ductile Iron पाइप लगनी थी, लेकिन उसकी जगह कम गुणवत्ता वाली HDPE पाइप लगाई गई।
कई स्थानों पर पुरानी पाइप को नया बताकर बिल पास कर दिया गया और करोड़ों रुपए उठाए गए।
कई किलोमीटर तक पाइपलाइन नहीं डली, लेकिन विभाग ने भुगतान जारी कर दिया।
ठेकेदार पदमचंद जैन हरियाणा से चोरी की पाइप लाकर उसे नई बताकर डालता रहा।
गंभीर आरोप है कि फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर टेंडर मिला, जिसकी जानकारी अधिकारियों को थी, लेकिन राजनीतिक दबाव में काम जारी रहा।