



देश की राजनीति में इलेक्टोरल फंडिंग का बड़ा खुलासा हुआ है। चुनाव आयोग (EC) की वेबसाइट पर अपलोड हुई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए भाजपा को कांग्रेस की तुलना में करीब तीन गुना राजनीतिक चंदा मिला।
रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए 959 करोड़ रुपए मिले। कांग्रेस को कुल 517 करोड़ रुपए का राजनीतिक चंदा प्राप्त हुआ, जिसमें से 313 करोड़ रुपए इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए दिए गए थे।
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कुल ₹184.5 करोड़ मिले जिसमें 153 करोड़ रुपए इलेक्टोरल ट्रस्ट्स से आए। कांग्रेस की वार्षिक डोनेशन रिपोर्ट उपलब्ध है, जबकि BJP की रिपोर्ट अभी EC पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं की गई है।
इलेक्टोरल ट्रस्ट क्या हैं?
इलेक्टोरल ट्रस्ट रजिस्टर्ड संस्थाएं हैं जो कंपनियों और राजनीतिक दलों के बीच पारदर्शी फंडिंग का माध्यम बनती हैं।
कंपनियां राजनीतिक दलों को सीधे दान नहीं भेजतीं।उनका चंदा पहले ट्रस्ट के पास जाता है, जो इसे विभिन्न दलों को वितरित करता है।इन्हें कंपनी एक्ट, आयकर कानून की धारा 13B, इलेक्टोरल ट्रस्ट स्कीम 2013 और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत नियंत्रित किया जाता है। नियम—कम से कम 95% चंदा उसी वित्त वर्ष में राजनीतिक दलों को देना अनिवार्य है।
BJP को सबसे ज्यादा चंदा टाटा समूह के PET से मिला
चंदे की विस्तृत सूची के अनुसार:
Progressive Electoral Trust (टाटा ग्रुप): ₹757.6 करोड़
New Democratic Trust: ₹150 करोड़
Harmony Trust: ₹30.1 करोड़
Triumph Trust: ₹21 करोड़
Jan Kalyan Trust: ₹9.5 लाख
Einzigartig Trust: ₹7.75 लाख
टाटा समूह के PET ने यह रुझान पहले भी दिखाया है। 2018-19 में भी PET ने 3 दलों को 454 करोड़ बांटे थे, जिनमें से 356 करोड़ अकेले BJP को मिले थे।
कांग्रेस को मिले प्रमुख चंदे
Prudent Electoral Trust: ₹216.33 करोड़
AB General Trust: ₹15 करोड़
New Democratic Trust: ₹5 करोड़
Jan Kalyan Trust: ₹9.5 लाख
हालांकि ट्रस्टों से कांग्रेस को मिली राशि 2023-24 में इलेक्ट्रोरल बॉन्ड से मिले 828 करोड़ की तुलना में काफी कम रही।आईटीसी लिमिटेड, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, सेंचुरी प्लाईवुड्स जैसी कंपनियों ने भी कांग्रेस को दान दिया। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी 3 करोड़ रुपए का व्यक्तिगत योगदान किया।
टाटा समूह ने 10 पार्टियों को दिए 914 करोड़ रुपए
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा समूह के PET ने बीते साल कुल 914 करोड़ रुपए 10 राजनीतिक दलों को वितरित किए।
इसमें—
भाजपा को 757 करोड़ (83%)
कांग्रेस को 77.3 करोड़
TMC, YSRCP, शिवसेना, बीजद, BRS, LJP (RV), JDU और DMK को 10-10 करोड़ रुपए मिले।
PET को चंदा टाटा समूह की 15 कंपनियों से मिला।
Tata Sons: ₹308 करोड़
TCS: ₹217 करोड़
Tata Steel: ₹173 करोड़
बॉन्ड बंद होने के बाद ट्रस्ट बने फंडिंग का मुख्य जरिया
फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता के अभाव में इलेक्ट्रोरल बॉन्ड को रद्द कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक दलों की फंडिंग में सबसे प्रमुख माध्यम इलेक्टोरल ट्रस्ट बन गए हैं, जो पिछले 12 वर्षों से काम कर रहे हैं।