Saturday, 29 August 2026

अब बिना कन्वर्जन और 90A के नहीं होगी सोसाइटी पट्टों की रजिस्ट्री: पूरे प्रदेश में रजिस्ट्री ऑफिसों में कामकाज ठप


अब बिना कन्वर्जन और 90A के नहीं होगी सोसाइटी पट्टों की रजिस्ट्री: पूरे प्रदेश में रजिस्ट्री ऑफिसों में कामकाज ठप

राजस्थान में सोसाइटी पट्टों की रजिस्ट्री को लेकर बड़ा बदलाव लागू हो गया है। राज्य सरकार ने रजिस्ट्रेशन एक्ट-2021 में किए गए संशोधन को मंगलवार से प्रभावी कर दिया, जिसके बाद प्रदेशभर के रजिस्ट्री ऑफिसों में कामकाज लगभग ठप हो गया। नई व्यवस्था के तहत बिना कन्वर्जन और 90A की मंजूरी वाले सोसाइटी पट्टों की अब रजिस्ट्री नहीं होगी, और यदि होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित उप रजिस्ट्रार पर होगी।

नए नोटिफिकेशन के बाद रजिस्ट्री के समय भूखंड मालिक को यह स्पष्ट करना अनिवार्य हो गया है कि जिस जमीन पर प्लॉट खरीदा है, क्या उसका विधिवत कन्वर्जन हो चुका है या वह 90A में शामिल है। यह दस्तावेज प्रस्तुत किए बिना अब रजिस्ट्री संभव नहीं होगी।

सरकारी, SC-ST और कृषि भूमि के गलत बेचान पर लगेगी रोक

सरकार के इस निर्णय के पीछे प्रमुख उद्देश्य जमीन की अवैध प्लॉटिंग, सरकारी एवं SC-ST भूमि के गलत हस्तांतरण और कृषि भूमि के अवैध बेचान पर प्रभावी रोक लगाना है। काश्तकारी अधिनियम के अनुसार SC-ST श्रेणी की जमीन केवल इसी वर्ग के व्यक्ति को बेची जा सकती है। लेकिन प्रदेश में कई सोसाइटियों द्वारा SC-ST की जमीन बिना कन्वर्जन के खरीदकर प्लॉटिंग करने के मामलों में लगातार वृद्धि हुई, जिससे बड़े स्तर पर विवाद पैदा होते रहे।

रजिस्ट्री ऑफिसों में भ्रम, आमजन की बढ़ी परेशानी

नियम लागू होते ही उप रजिस्ट्रार केवल उन्हीं सोसाइटी पट्टों की रजिस्ट्री कर रहे हैं, जिनके दस्तावेजों में कन्वर्जन और 90A का स्पष्ट उल्लेख मौजूद है। इससे उन लोगों की परेशानी बढ़ गई है, जिन्होंने पहले ही सोसाइटी से प्लॉट खरीद लिए हैं, क्योंकि यदि उनके पास कन्वर्जन व 90A की दस्तावेजी स्थिति स्पष्ट नहीं है तो उन्हें अब जिला प्रशासन या JDA कार्यालयों से यह दस्तावेज प्राप्त करने होंगे।

रजिस्ट्री ऑफिसों में काम करने वाले वकीलों ने भी नियम का विरोध करते हुए कहा कि बिना उचित तैयारी के लागू किया गया यह निर्णय आमजन के लिए गंभीर समस्या पैदा करेगा।

सरकार की आमदनी में इजाफे की संभावना

प्रदेश में होने वाली रजिस्ट्री में लगभग 60% हिस्सेदारी सोसाइटी पट्टों की होती है। नए नियम के बाद सोसाइटियां कन्वर्जन और 90A की मंजूरी लेने के बाद ही कॉलोनी विकसित कर सकेंगी। इससे कन्वर्जन फीस और 90A शुल्क के रूप में सरकार की राजस्व आय में भारी वृद्धि होगी। साथ ही जमीन से जुड़े विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।

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