



केंद्र सरकार ने पूर्वी राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) और पार्वती–कालीसिंध–चंबल (PKC) लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने से फिलहाल इनकार कर दिया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरीने स्पष्ट कहा कि ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में शामिल करने का कोई प्रस्ताव मंत्रालय में विचाराधीन नहीं है।
भाजपा सांसद गहलोत ने ईआरसीपी की मौजूदा स्थिति और इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर प्रश्न पूछा था। इसके जवाब में मंत्री ने बताया कि परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) केंद्रीय जल आयोग (CWC) को प्रस्तुत की जा चुकी है और वह वर्तमान में विचाराधीन है। हालांकि, परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर शामिल करने के लिए मंत्रालय के पास कोई सक्रिय प्रस्ताव नहीं है।
जलशक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरीने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना—विशेषकर नदियों को जोड़ने वाली परियोजनाओं—को राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करने का निर्णय कई स्तरों की प्रक्रिया पर आधारित होता है। इसमें मौजूदा केंद्रीय गाइडलाइंस, नीतिगत ढांचे, आर्थिक मूल्यांकन, सक्षम प्राधिकरणों की मंजूरी और बजट प्रावधान प्रमुख रूप से शामिल होते हैं।
ईआरसीपी की मौजूदा हालत पर केंद्र का जवाब- केंद्रीय जल आयोग को भेजी गई पीकेसी की डीपीआर
ईआरसीपी की मौजूदा हालत के बारे में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया- चंबल नदी प्रणाली के जल स्रोतों का पूरा उपयोग करने के लिए और राजस्थान व मध्य प्रदेश राज्यों के साथ चर्चा के बाद संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (एमपीकेसी) लिंक का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस प्रस्ताव में मध्य प्रदेश सरकार से प्रस्तावित कूनो, पार्वती और कालीसिंध उप-बेसिन और राजस्थान सरकार से प्रस्तावित पूर्वी राजस्थान केनाल परियोजना (ईआरसीपी) को मिलाया गया है। पीकेसी पर राजस्थान से जुड़े प्रोजेक्ट के बिंदुओं पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी हो चुकी है। वहीं तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन के लिए जल शक्ति मंत्रालय के तहत केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को पेश कर दिया गया है।
2024 में हुआ था पीकेसी परियोजन का एमओयू और एमओए
जलशक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया- पीकेसी लिंक परियोजना के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच 28 जनवरी 2024 को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद 5 दिसंबर 2024 को करार ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए।राजस्थान के लिए ईआरसीपी एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना मानी जाती है, जिसका उद्देश्य पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में पेयजल और सिंचाई की दीर्घकालिक समस्या का समाधान करना है। केंद्र के इस जवाब के बाद परियोजना को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।