



जयपुर शहर के प्रख्यात रंगकर्मी, थिएटर निदेशक और सामाजिक आंदोलनों के सक्रिय चेहरा प्रमोद भसीन का सोमवार तड़के निधन हो गया। 83 वर्षीय भसीन ने सुबह करीब 3 बजे अपने निजी आवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही जयपुर के सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक जगत में गहरा शोक फैल गया।
प्रमोद भसीन की अंतिम इच्छा के अनुसार उनकी देह को ईएसआईसी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय अध्ययन के लिए दान कर दिया गया है—जो उनके सामाजिक सरोकारों और मानव सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भसीन ने अपना संपूर्ण जीवन रंगमंच, सामाजिक कार्यों और नवोदित कलाकारों के मार्गदर्शन को समर्पित किया। उनकी संस्था ‘त्रिमूर्ति’ ने दशकों तक नई पीढ़ी के रंगकर्मियों को मंच प्रदान किया और उनकी प्रतिभा को निखारने का महत्वपूर्ण कार्य किया। युवा कलाकारों को प्रेरित करने और उनके भीतर नाटक और समाज के प्रति संवेदनशीलता जगाने में उनका योगदान अमूल्य माना जाता है।
जयपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य में भसीन का प्रभाव अत्यंत गहरा रहा। वे लंबे समय तक रविंद्र मंच की विभिन्न गतिविधियों के केंद्र में रहे और वहां रंगमंचीय प्रयोगों, नाट्य-आंदोलनों और नई शैलियों को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई कलाकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचे और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। प्रमोद भसीन का निधन राजस्थान के रंगमंच जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनात्मकता, सामाजिक चेतना और युवा कलाकारों के प्रति स्नेह की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।