Saturday, 29 August 2026

ब्यूरोक्रेसी और संगठन बदलाव के बाद अब सत्ता में फेरबदल की तैयारी: मंत्रिमंडल विस्तार और 80 राजनीतिक नियुक्तियों पर टिकी निगाहें


ब्यूरोक्रेसी और संगठन बदलाव के बाद अब सत्ता में फेरबदल की तैयारी: मंत्रिमंडल विस्तार और 80 राजनीतिक नियुक्तियों पर टिकी निगाहें

राजस्थान में हाल ही में ब्यूरोक्रेसी और पार्टी संगठन में बड़े बदलावों के बाद अब सत्ता में फेरबदल की बारी आ गई है। दिसंबर के पहले सप्ताह के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और बदलाव की संभावनाएँ तेज हो गई हैं। मंत्रिमंडल में नए चेहरों के शामिल होने के साथ ही राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू होगा, जिसके तहत बोर्ड–निगमों में करीब 80 बड़े पदों पर नियुक्तियाँ की जाएँगी।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए कई नेताओं को इस बार राजनीतिक नियुक्तियों में जगह मिलने की उम्मीद है, क्योंकि संगठन की नई सूची में ऐसे किसी चेहरे को प्रमुखता नहीं दी गई है। हालांकि ज्योति मिर्धा को पहले भी संगठन में पद मिल चुका है।

राजस्थान में आने वाले महीनों में पंचायत और निकाय चुनाव होने हैं, साथ ही भजनलाल सरकार की पहली वर्षगांठ भी नजदीक है। ऐसे में सरकार सत्ता और संगठन की वर्किंग में तेजी लाने के प्रयास में है। बोर्ड–निगमों में भाजपा से जुड़े कई बड़े नाम—जैसे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, प्रतिपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़,पूर्व मंत्री प्रभु लाल सैनी,पूर्व उपाध्यक्ष सरदार अजय पाल सिंह, पूर्व महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा,पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, लक्ष्मीकांत भारद्वाज—को पद मिलने की संभावनाएँ जताई जा रही हैं।

प्रदेश संगठन की 34 पदाधिकारियों की सूची में 12 पदाधिकारियों का जयपुर से होना नए समीकरणों को दर्शाता है। इससे मारवाड़ सहित कई जिलों में पद न मिलने पर नाराज़गी भी सामने आई है। इस बार संगठन में एक अनूठी स्थिति भी बनी है—राजस्थान बीजेपी में पहली बार किसी पदाधिकारी को लगातार पाँचवीं बार जगह मिली है। संगठन मंत्री मुकेश दाधीच पिछले 11 वर्षों से प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे पहले अशोक परनामी, मदनलाल सैनी, सतीश पूनिया और सी.पी. जोशी जैसे नेता चार-चार बार रिपीट हुए थे, लेकिन पाँचवीं बार का यह रिकॉर्ड पहली बार बना है। दूसरी ओर कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री लालचंद कटारिया, पूर्व मंत्री राजेंद्र यादव, पूर्व सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा, विजयपाल मिर्धा, रिछपाल मिर्धा, ज्योति खंडेलवाल, सुरेश मिश्रा समेत कई नेताओं को अभी भी पद का इंतजार है। चर्चा है कि इनमें से कुछ चेहरों को सियासी नियुक्तियों के माध्यम से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।

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