Saturday, 29 August 2026

धर्मांतरण विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राजस्थान सरकार को फिर नोटिस, देशभर की लंबित याचिकाओं के साथ होगी संयुक्त सुनवाई


धर्मांतरण विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राजस्थान सरकार को फिर नोटिस, देशभर की लंबित याचिकाओं के साथ होगी संयुक्त सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को एक बार फिर नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।

पीठ ने निर्देश दिया कि इस याचिका को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा और झारखंड के समान धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर लंबित याचिकाओं के साथ टैग किया जाए। अब सुप्रीम कोर्ट इन सभी याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई करेगा। यह पहली बार है जब देशभर के सभी ऐसे कानूनों पर कोर्ट एक साथ विचार करेगा।

याचिका में उठे गंभीर सवाल

PUCL ने अपनी याचिका में कहा है कि राजस्थान का धर्मांतरण विरोधी कानून—

  • व्यक्तिगत आस्था पर अनुचित सरकारी नियंत्रण लगाता है,

  • अंतर-धार्मिक संबंधों को अनावश्यक रूप से अपराध की श्रेणी में रखता है,

  • धर्म परिवर्तन से पहले अधिकारियों को पूर्व-नोटिस देना अनिवार्य करता है,

  • पुलिस को अत्यधिक एवं दखलकारी शक्तियां प्रदान करता है।

याचिका का तर्क है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों और संवैधानिक मानकों के बिल्कुल विपरीत है और राज्य विधानसभा ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कानून बनाया है।

पहले भी तीन याचिकाओं में हो चुकी है चुनौती

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले दशरथ कुमार हिनुनिया व अन्य,एम. हुजैफा व अन्य,जयपुर कैथोलिक वेलफेयर सोसायटी द्वारा दाखिल तीन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुका है। अब सभी याचिकाओं को क्लब करके एक साथ सुना जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल

आज सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट में हाजिर होकर देशभर में धर्मांतरण कानूनों को चुनौती देने वाली सभी लंबित याचिकाओं, ट्रांसफर याचिकाओं, विशेष अनुमति याचिकाओं (SLPs) और अन्य याचिकाओं की समग्र सूची सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रस्तुत की।

इससे कोर्ट को एक व्यापक दृष्टि मिल सकेगी कि देश में धर्मांतरण कानूनों को लेकर कितनी कानूनी चुनौती सामने हैं।

राजस्थान ने 2025 में लागू किया था कानून

राजस्थान विधानसभा ने 9 सितंबर 2025 को राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक, 2025 पास किया था।

29 अक्टूबर 2025 को राज्यपाल की मंजूरी और अधिसूचना के बाद यह कानून राज्य में लागू हो गया।कानून में धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कड़े दंड और सख्त प्रावधान शामिल हैं।

सरकार का तर्क है कि यह कानून जबरन, धोखे से या प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया है, जबकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।

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