



राजस्थान में प्रस्तावित एक बांध परियोजना पर सियासी और सामाजिक घमासान उस समय शुरू हो गया, जब यह योजना अभी कागजों से बाहर आई भी नहीं है। करौली और सवाई माधोपुर जिलों के हजारों किसानों को लाभ पहुँचाने वाली इस सिंचाई परियोजना पर योजना लागू होने से पहले ही तीखा विरोध और समर्थन दोनों स्वर उठने लगे हैं।
एक पक्ष ने इस परियोजना के विरोध में बड़ी महापंचायत कर अपना रोष जताया है। सवाई माधोपुर में योजना रद्द करवाने की मांग को लेकर रैली भी आयोजित की जा चुकी है, जिसमें दावा किया गया कि इस बांध से 75 से अधिक गांव प्रभावित होंगे। विरोधियों का कहना है कि यह परियोजना ग्रामीणों की जमीन, घर और आजीविका पर सीधा असर डालेगी।
युवा नेता नरेश मीणा ने भी खुलकर विरोध जताते हुए कहा कि “इस बांध की एक भी ईंट नहीं रखने देंगे।” उनकी इस बयानबाजी के बाद विरोध का स्वर और मुखर हो गया। महापंचायतों में भी लोगों ने इस योजना को जनविरोधी बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग रखी।
राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह कदम पीछे हटाने के मूड में नहीं है। जयपुर में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणाने जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बैडम के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता करके कहा कि परियोजना पूरी तरह कल्याणकारी है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, उद्योगों को नई राह मिलेगी और क्षेत्र में पर्यटन भी बढ़ेगा।
सरकार ने विरोध को “अफवाह”, “भ्रामक प्रचार” और “गैर-जिम्मेदार तत्वों का बहकावा” करार देते हुए जनता से अपील की कि सच्चाई समझें और विकास की राह में बाधा न बनने दें। फिलहाल, योजना पर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर तीखा टकराव जारी है, और इसका असर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।