



राजस्थान के नए प्रमुख सचिव वी. श्रीनिवास ने पदभार संभालते ही अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत दे दिया है। उन्होंने बताया कि उनका प्रमुख लक्ष्य आमजन का डिजिटल एम्पावरमेंट करना और टेक्नोलॉजी के माध्यम से गवर्नेंस को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। पदभार संभालने के बाद जारी हुई पहली तबादला सूची में उन्होंने किसी भी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार नहीं दिया, बल्कि विभागों का इंटीग्रेशन करके प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया।
श्रीनिवास ने कहा कि काम की गति बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर है। उन्होंने बताया कि संपर्क पोर्टल पर रोजाना लगभग 20 लाख कॉल्स आ रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि गुणवत्तापूर्ण शिकायत निस्तारण जनता के भरोसे और सरकार की विश्वसनीयता को बढ़ा सकता है। उनके अनुसार, सर्विस डिलीवरी को तेज करने, संस्थाओं के ट्रांसफॉर्मेशन और अधिकतम क्षमता के साथ काम करने के लिए टेक्नोलॉजी और नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार की चार प्रमुख प्राथमिकताएँ—गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति—को मजबूत करने के लिए सिस्टम का सरलीकरण किया जा रहा है। तकनीक की मदद से भ्रष्टाचार कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने, प्रक्रियाओं को स्ट्रीमलाइन करने और आमजन के लिए सेवाओं को अधिक सहज और उपयोगी बनाने पर काम किया जाएगा।
विभागों में बेहतर समन्वय के लिए उन्होंने केंद्र सरकार के “विकसित भारत–2047” मॉडल की तर्ज पर सेक्टोरल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज की व्यवस्था लागू की है। उन्होंने बताया कि विकसित राजस्थान विज़न 2047 के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, डेयरी, पंचायतीराज सहित 10 प्रमुख क्षेत्रों में सचिवों को समूहों के रूप में जोड़ा गया है। इन ग्रुपों की ज़िम्मेदारी होगी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा करें।
श्रीनिवास ने अफसरों की कमी पर भी स्पष्ट किया कि विभागों के इंटीग्रेशन से लगभग 25 प्रमुख सचिव स्तर के पदों की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाती है। पहली सूची में ही हेल्थ–मेडिकल एजुकेशन और प्लान–आईटी जैसे बड़े विभागों का विलय किया गया है।
ब्यूरोक्रेसी के भीतर समन्वय पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण–माइंस, पुलिस–पीडब्ल्यूडी–ट्रांसपोर्ट–हेल्थ के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दे लटके रहते हैं। भविष्य में मुख्य सचिव स्तर की को-ऑर्डिनेशन मीटिंग्स अधिक प्रभावी और निर्णायक होंगी। आमजन से जुड़ाव पर उन्होंने कहा कि वे हमेशा लोगों के बीच जाकर उनके सुझाव सुनने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने बताया कि अपने पूर्व कार्यकाल में एम्स में हर रोज 25 हजार मरीजों से और राजस्व मंडल में 5 हजार किसानों से सामना होता था। राजस्थान में भी वे 60 हजार किसानों से मिल चुके हैं और उनकी समस्याओं को समझकर प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर काम करेंगे।