



सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान पुलिस और राज्य के डीजीपी के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना से जुड़े एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने निर्देश दिया कि राजस्थान के डीजीपी स्वयं एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करें और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराकर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि एसआईटी की जवाबदेही सीधे डीजीपी पर होगी।
मामला एक महिला शिकायतकर्ता से जुड़ा है, जिसने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने वर्ष 2017 में राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि एक व्यक्ति उसका पीछा कर रहा है और इस कृत्य में महाराष्ट्र पुलिस का एक अधिकारी भी सहयोग कर रहा है। महिला ने हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी।
वर्ष 2018 में राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस की एक रिपोर्ट देखकर मामला निस्तारित कर दिया था। इस रिपोर्ट में पुलिस ने संबंधित आरोपी के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दर्ज करने की बात कही थी। हाईकोर्ट ने उस समय पुलिस को आदेश दिया था कि महिला की सुरक्षा में लापरवाही बिल्कुल न बरती जाए और किसी भी स्थिति में उसे परेशान न किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि आदेश का उल्लंघन होता है, तो महिला दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।
महिला ने कुछ समय बाद एक और याचिका दायर कर राजस्थान पुलिस पर हाईकोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया। इसका संज्ञान लेते हुए अब सर्वोच्च न्यायालय ने कड़े निर्देश जारी करते हुए SIT जांच को अनिवार्य कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश राज्य पुलिस की जवाबदेही और अदालत के आदेशों के क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण मापदंड माना जा रहा है।