राजस्थान सरकार ने 21 नवंबर की देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 48 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। यह बदलाव खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालने के बाद नौकरशाही में किया गया पहला बड़ा बदलाव है। एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं, जिनका असर सीधे राज्य प्रशासन की दिशा और कार्यशैली पर पड़ने वाला है।
सबसे चर्चित बदलाव मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में हुआ है, जहां अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल को हटा दिया गया और उनकी जगह जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा को नियुक्त किया गया है। सचिवालय के गलियारों में यह परिवर्तन कई तरह के संकेत दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अफसरों के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद और टकराव बढ़ गया था, जिसके चलते निर्णय प्रक्रिया बाधित हो रही थी।
शिखर अग्रवाल की विदाई—क्यों?: सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय में पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत और कुछ अन्य अधिकारियों के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति थी। पंत के दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद यह अपेक्षा की जा रही थी कि सीएमओ कार्यालय में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव होंगे। अब शिखर अग्रवाल की उद्योग विभाग में पोस्टिंग को उसी विवाद की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है।
करीब साढ़े पांच महीने पहले मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे आलोक गुप्ता को सीएमओ से हटाया गया था, जिसे भी इसी आंतरिक खींचतान और प्रशासनिक असंतुलन से जोड़कर देखा गया था। इस बार की सूची ने यह संकेत और भी मजबूत कर दिया है कि सरकार सीएमओ में किसी भी तरह के टकराव, देरी और निर्णयहीनता को अब बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है
आईएएस तबादला लिस्ट का विश्लेषण: दीया कुमारी की नाराजगी, राजस्व विभाग में देरी, मेडिकल लाबी का दबाव—कौन क्यों हटाया गया और किसका कद बढ़ा ? : 48 आईएएस अफसरों की तबादला सूची सिर्फ विभागीय फेरबदल नहीं, बल्कि राज्य की नौकरशाही में बड़े बदलावों का संकेत है। गहन विश्लेषण के मुताबिक कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाए जाने के पीछे विभागीय नाकामी, राजनीतिक असंतोष, लॉबी प्रेशर और कार्यप्रणाली में कमियां मुख्य कारण रही हैं।
राजेश यादव: क्या उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी नाराज थीं? पर्यटन विभाग के प्रमुख शासन सचिव राजेश कुमार यादव को साढ़े पांच महीने के भीतर ही बदल दिया गया। ब्यूरोक्रेसी सूत्रों के अनुसार, पर्यटन विभाग देख रहीं उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी उनकी कार्यशैली से असंतुष्ट थीं। राजस्थान की नई पर्यटन नीति लंबे समय से तैयार होने के बावजूद फाइनल नहीं हो पा रही थी। हाल ही में कैबिनेट बैठक में इसे अनुमोदन के लिए रखा जाना था, लेकिन आखिरी क्षण में इसे एजेंडे से हटा लिया गया, जिसके बाद विभाग की धीमी प्रगति को लेकर नाराजगी और बढ़ गई।
दिनेश कुमार: राजस्व विभाग में देरी की भारी कीमत: राजस्व विभाग के प्रमुख शासन सचिव दिनेश कुमार को भी उनके पद से हटाया गया है। सूत्र बताते हैं कि ‘राइजिंग राजस्थान’ जैसी महत्वपूर्ण सरकारी पहल और कई प्रमुख मामलों—जैसे जयपुर नगर निगम क्षेत्र में 85 गांवों के परिसीमन—का समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा था। सरकार की प्राथमिक परियोजनाओं में तेजी न आने को उनकी कार्यशैली के खिलाफ एक बड़ी रिपोर्ट के रूप में देखा गया।
अंबरीश कुमार: डॉक्टर्स लॉबी की नाराजगी बनी वजह: मेडिकल एजुकेशन विभाग में शासन सचिव अंबरीश कुमार काफी समय से SMS अस्पताल और इससे जुड़े संस्थानों में सुधार लाने के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने कई नवाचार लागू किए, लेकिन उन्हें डॉक्टर्स लॉबी का समर्थन नहीं मिला। नई गाइडलाइन जारी होने के बाद, जिसमें मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और अधीक्षकों की नियुक्तियों को लेकर सख्त नियम बनाए गए—मेडिकल फ्रैटर्निटी उनके खिलाफ एकजुट हो गई। इसके अतिरिक्त, SMS ट्रॉमा सेंटर में आग, एक डॉक्टर पर ACB कार्रवाई और अव्यवस्थाओं ने भी उनके खिलाफ माहौल बनाया। परिणामस्वरूप, उन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग भेज दिया गया।
महिला IAS अफसरों का कद बढ़ा: किसे क्या मिला?: मंजू राजपाल: वर्ष 2000 बैच की IAS मंजू राजपाल को बड़ा प्रशासनिक विस्तार मिला है। अब वे कृषि विभाग, उद्यानिकी, सहकारिता, पंचायतीराज—कई महत्वपूर्ण विभागों की प्रमुख शासन सचिव होंगी। यह उनके उत्कृष्ट कामकाज पर सरकार के विश्वास को दर्शाता है।
गायत्री एस. राठौड़: वर्ष 1997 बैच की IAS गायत्री राठौड़ पहले से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव थीं। अब उन्हें मेडिकल एजुकेशन विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई है। अंबरीश कुमार के हटने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण नियुक्ति मानी जा रही है।
अर्चना सिंह: वर्ष 2008 बैच की IAS अर्चना सिंह, जिन्हें बांसवाड़ा में पीएम मोदी की सभा में तकनीकी गड़बड़ी के बाद APO कर दिया गया था, अब वापस मुख्यधारा में आ गई हैं। सरकार ने उन्हें कार्मिक विभाग का सचिव बनाकर ‘प्राइम पोस्ट’ दी है।
शुचि त्यागी: वर्ष 2007 बैच की IAS शुचि त्यागी का कद भी बढ़ाया गया है। वे परिवहन विभाग की शासन सचिव बनी रहेंगी और साथ ही अब देवस्थान विभाग की जिम्मेदारी भी संभालेंगी। उनके कार्यभार को संतुलित करने के लिए उनसे कार्मिक विभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है।
निष्कर्ष: राजस्थान की नौकरशाही में यह बड़ा reshuffle एक स्पष्ट संकेत देता है—सरकार अब देरी, असंतोष और विभागीय विवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी। उच्च प्राथमिकता वाले विभागों में तेज़, पारदर्शी और समन्वित कामकाज सुनिश्चित करने के लिए सरकार नए सिरे से टीम तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में दिल्ली से लौट रहे दो IAS अधिकारियों की संभावित एंट्री के बाद और भी बदलाव होने की संभावना है।