



जयपुर। राजस्थान पुलिस अकादमी में शुक्रवार को राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन 2025 का भव्य और महत्वपूर्ण आयोजन किया गया। ‘उत्कृष्टता के साथ पुलिसिंग—आगे की राह’ थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बड़ी संख्या में अधिकारी जुड़े। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण एवं यातायात) अनिल पालीवाल ने तकनीक और मानवीय पहलुओं के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के उद्धरण “इच्छति–जानति–करोति” का महत्व बताया। इस दौरान महानिदेशक गृह रक्षा श्रीमती मालिनी अग्रवाल ने क्षेत्र विशेष की चुनौतियों के आधार पर अलग-अलग कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रणनीति बनाने की जरूरत पर बल दिया।
सम्मेलन के प्रथम सत्र में महानिरीक्षक पुलिस (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार ने नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि नए कानून दंड के बजाय न्याय पर केंद्रित हैं और लगभग सभी कानूनी प्रक्रियाओं में समय सीमा निर्धारित कर दी गई है। इसमें शून्य एफआईआर (Zero FIR), पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था, बुजुर्गों की पूछताछ आयु सीमा 65 से कम होकर 60 वर्ष होना और गंभीर व आदतन अपराधियों को हथकड़ी लगाने की अनुमति जैसे बदलाव शामिल हैं। अपराधों से अर्जित संपत्ति को अपने नाम करने पर तीन वर्ष की सजा का प्रावधान भी अब आपराधिक श्रेणी में जोड़ा गया है।
दूसरा सत्र पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), चैटGPT, डीप फेक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर केंद्रित रहा। महानिरीक्षक पुलिस (SCRB) अजय पाल लांबा ने बताया कि कैसे AI के माध्यम से दिल्ली पुलिस ने 3,000 से अधिक गुमशुदा बच्चों को बरामद किया। उन्होंने यातायात चालान और जांच प्रक्रिया में AI के प्रभावी उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत किए। उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर अपराध) विकास शर्मा ने चेतावनी दी कि आने वाले 2–3 वर्षों में AI को न समझने वाले पुलिसकर्मियों के पिछड़ने की आशंका है। उन्होंने डेटा चोरी, वीआईपी मूवमेंट डेटा लीक जैसे साइबर जोखिमों पर भी विस्तार से चर्चा की।
तृतीय सत्र में एडीजी (सिविल राइट्स) श्रीमती लता मनोज कुमार और एसपी (जयपुर ग्रामीण) श्रीमती राशि डोगरा ने महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के विरुद्ध अपराधों पर निवारक और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र पर चर्चा की। नए आपराधिक कानूनों में इन अपराधों के लिए अलग अध्याय जोड़ा गया है। इस सत्र में पोक्सो, ई-बॉक्स, महिला कर्मचारियों की उपस्थिति में बयान, वूमेन सेफ्टी एम्बेसडर और सामुदायिक पुलिसिंग की पहल पर जोर दिया गया। चूरू में दलित दूल्हे की बिंदौरी के समय प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिती को सकारात्मक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
चतुर्थ सत्र सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को समर्पित रहा। एडीजी यातायात बी.एल. मीणा ने बताया कि राजस्थान में सड़क दुर्घटना मृत्यु दर हत्या की तुलना में 4–5 गुना अधिक है, जिसे कम करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई है। डीसीपी यातायात सुमित मेहरड़ा ने बताया कि एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के समन्वय से 1100 अवैध कट बंद किए गए, 1250 साइनबोर्ड लगाए गए और 2318 ब्लैक स्पॉट्स में से 2084 को सुधार दिया गया है। तेज रफ्तार वाहनों पर चालान, लाइसेंस निरस्तीकरण और गुड सेमेरिटन को ₹1 लाख तक के प्रोत्साहन जैसे कदमों पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजस्थान पुलिस आधुनिक तकनीक, नए कानूनों और सामाजिक सुरक्षा की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए निर्णायक रूप से तैयार है। यह आयोजन न्याय, सुरक्षा और नागरिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए भविष्य की पुलिसिंग का मजबूत आधार तैयार करता है।