



अजमेर के कुंदन नगर रोड पर बने जम्मू होटल के अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट ने निर्णय एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व न्यायमूर्ति बलविंदर सिंह संधू ने निर्णय सुनाते हुए होटल को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। tapasvi associate and legal concern tant LLP के अधिवक्ता गण हर्षिता शर्मा विवेक यादव लक्ष्य शर्मा ने पैरवी की। हाई कोर्टने स्पष्ट रूप से कहा कि होटल का निर्माण कानूनों के विपरीत किया गया है और यह न सिर्फ सड़क सुरक्षा बल्कि आम आवागमन में भी गंभीर बाधा उत्पन्न कर रहा है। आदेश में उल्लेख है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी चाहें तो होटल को हटाए बिना भी स्थिति में सुधार किया जा सकता था, लेकिन जिस तरह से अवैध निर्माण वर्षों से चल रहा था, उससे यह स्पष्ट था कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही तथा अनियमितताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
हाई कोर्ट ने माना कि सुभाषनगर रोड जनता के आवागमन, यातायात और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और इस पर किसी भी प्रकार की अवैध अतिक्रमण गतिविधि सार्वजनिक जीवन को खतरे में डाल सकती है। कोर्ट ने कहा कि नगर नियोजन कानूनों, मास्टर प्लान, बिल्डिंग बाई-लॉज और सड़क सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश अधिकारियों की चूक या लापरवाही से अवैध निर्माण बढ़ा है, तो भी उसे “समानता” या “लंबे समय से खड़ा होने” के आधार पर वैध नहीं माना जा सकता।
हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सड़क या सड़क की सीमा रेखा में किसी भी प्रकार का निर्माण करना पूरी तरह अवैध है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि Rule of Law सर्वोपरि है। यदि कोई नागरिक या अधिकारी कानून का पालन नहीं करता, तो उसे दंडित किया जा सकता है और किसी भी अवैध निर्माण को हटाना प्रशासनिक कर्तव्य है।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां होटल बना है, वह भूमि व्यावसायिक उपयोग के लिए अधिसूचित नहीं है और Land Use Change (LUC) की कोई स्वीकृति नहीं ली गई। होटल का निर्माण मास्टर प्लान, नगर योजन एवं सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया था। अदालत ने कहा कि सड़क की चौड़ाई कम कर यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त किया जाए, ताकि सड़क और सार्वजनिक जगहों का मूल स्वरूप बहाल हो सके। संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, जिन्होंने अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया या नजरअंदाज किया।भविष्य में किसी भी अवैध निर्माण को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को जाम, दुर्घटनाओं और एम्बुलेंस/फायर ब्रिगेड के आवाजाही में बाधा जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
हाई कोर्ट ने कहा कि सड़क पर अवैध निर्माण न सिर्फ सुरक्षा जोखिम है, बल्कि आमजन के संवैधानिक अधिकारों का भी हनन है। ऐसे निर्माण से आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित होती है। इसलिए प्रशासन को आवश्यक है कि ऐसे सभी अतिक्रमण हटाकर सड़क को मूल स्थिति में लाया जाए।

