



जयपुर । राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि प्रदेश में लटके हुए पंचायत और नगर निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में कराए जाएं। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सरकार 31 दिसंबर 2025 तक सभी पंचायतों और निकायों में परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी कर ले। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एक्टिंग सीजे) एसपी शर्मा की खंडपीठ ने गिरिराज सिंह देवंदा और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की जनहित याचिकाओं सहित अन्य याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए यह निर्देश जारी किए।
प्रदेश में करीब 6,759 पंचायतों और 55 नगरपालिकाओं का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर कई जनहित याचिकाएं कोर्ट में दायर की गई थीं। कोर्ट ने इस पर सुनवाई पूरी करने के बाद 12 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था और अब करीब तीन महीने बाद निर्णय दिया है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए मनमाने तरीके से चुनाव स्थगित कर दिए। अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने दलील दी कि राज्य सरकार ने 16 जनवरी 2025 की अधिसूचना से पंचायत चुनाव रोक दिए, जो संविधान के अनुच्छेद 243E, 243K और राजस्थान पंचायत राज अधिनियम, 1994 की धारा 17 का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव एक दिन भी टाले नहीं जा सकते।
याचिका में यह भी कहा गया कि जिन पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, उनके सरपंच अब आम नागरिक हैं और ऐसे निजी व्यक्तियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करना पूरी तरह अवैध है। इससे लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई को अस्थिर किया गया है।
नगर निकाय चुनावों के मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की याचिका पर अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने कहा कि 55 नगरपालिकाओं का कार्यकाल नवंबर 2024 में ही समाप्त हो चुका है, लेकिन सरकार ने चुनाव न कराकर अवैध रूप से प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं। यह नगरपालिका अधिनियम-2009 और संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।
सिंघवी ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि प्राकृतिक आपदाओं को छोड़कर स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं टाले जा सकते। इस मामले में सरकार अपने संवैधानिक कर्तव्य के पालन में पूरी तरह विफल रही है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य सरकार को तुरंत परिसीमन प्रक्रिया को गति देनी होगी, ताकि तय समयसीमा के भीतर पंचायत और निकाय दोनों चुनाव संपन्न करवाए जा सकें।