Saturday, 29 August 2026

मुख्य सचिव सुधांश पंत केंद्र में होंगे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव,नए चीफ सेक्रेटरी की चर्चा जोरों पर


मुख्य सचिव सुधांश पंत केंद्र में  होंगे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव,नए चीफ सेक्रेटरी की चर्चा जोरों पर

जयपुर। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने रिटायरमेंट से 14 महीने पहले ही अपने पद से हटा दिया है । केंद्र सरकार ने उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में सचिव नियुक्त किया है। वे 1 दिसंबर 2025 से दिल्ली में कार्यभार संभाल सकते हैं। मौजूदा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव अमित यादव30 नवंबर को सेवानिवृत होने वाले हैं।

सुधांश पंत को 1 जनवरी 2024 को राजस्थान का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था। उनका सेवानिवृत्ति फरवरी 2027 में निर्धारित था । इस अप्रत्याशित निर्णय के बाद अब राज्य में नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इस पद पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव के आधार पर तीन नाम सबसे आगे चल रहे हैं — अखिल अरोड़ा, आनंद कुमार, और अभय कुमार।

अखिल अरोड़ा: मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारी: 1993 बैच के आईएएस अखिल अरोड़ा वर्तमान में जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। वे एक भरोसेमंद और निपुण अफसर माने जाते हैं। गहलोत सरकार में करीब डेढ़ साल तक वित्त विभाग के एसीएस रहे और कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों में उनकी भूमिका रही।

वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भी विश्वसनीय अफसरों में गिने जाते हैं, हालांकि कुछ लॉबी यह तर्क दे रही है कि उनका गहलोत सरकार से निकट संबंध रहा है, जो उनके रास्ते में अड़चन बन सकता है।

 आनंद कुमार: संतुलित और सादगीपूर्ण अधिकारी:1994 बैच के आईएएस आनंद कुमार फिलहाल वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। उनकी पहचान एक संतुलित और बेदाग अफसर के रूप में होती है। दलित वर्ग से आने के कारण राजनीतिक दृष्टि से भी उनका नाम मजबूत माना जा रहा है।

वे कांग्रेस और भाजपादोनों सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उनके समर्थक मानते हैं कि वह हर परिस्थिति में सबको साथ लेकर चलने वाले अधिकारी हैं, जबकि विरोधी कहते हैं कि वह “यस मैन” नहीं बनते, जिससे उन्हें टॉप पोस्ट से दूर रखा जा सकता है।

अभय कुमार: वरिष्ठता और जातीय समीकरण उनके पक्ष में: 1992 बैच के आईएएस अभय कुमार वर्तमान में जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं और वरिष्ठता के हिसाब से सबसे प्रबल दावेदार हैं। जातीय समीकरण भी उनके पक्ष में है, क्योंकि राजपूत समुदाय को साधने के लिए सरकार उनके नाम पर विचार कर सकती है।

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