Saturday, 29 August 2026

जयपुर नगर निगम का पुनर्गठन: 13 जोनों में विभाजित, 150 वार्ड, हेरिटेज कमिश्नर निधि पटेल एपीओ


जयपुर नगर निगम का पुनर्गठन: 13 जोनों में विभाजित, 150 वार्ड, हेरिटेज कमिश्नर निधि पटेल एपीओ

जयपुर। राजस्थान सरकार ने जयपुर नगर निगम का प्रशासनिक ढांचा बदलते हुए शहर को 13 नए जोनों में पुनर्गठित कर दिया है। स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब नगर निगम में कुल 150 वार्ड शामिल होंगे। यह नई संरचना आगामी नगर निगम चुनावों का आधार बनेगी। बढ़ती आबादी, शहर के विस्तार और सुशासन को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है।

नए पुनर्गठन के साथ ही जयपुर नगर निगम की प्रशासनिक सीमाएं पूरी तरह बदल जाएंगी। सरकार ने जयपुर नगर निगम हेरिटेज कमिश्नर निधि पटेल को एपीओ कर दिया है, जबकि नगर निगम ग्रेटर कमिश्नर डॉ. गौरव सैनी को नया नगर निगम जयपुर कमिश्नर नियुक्त किया है।

सरकार के अनुसार नए जोन शहर के विकास कार्यों को क्षेत्रवार संतुलित और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। हालांकि अधिकारियों की नई नियुक्ति अभी लंबित है, इसलिए यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।

जोनवार नए वार्डों की संरचना

1. मुरलीपुरा जोन (वार्ड 1 से 13)

विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र के पहले हिस्से में शामिल।

2. विद्याधर नगर जोन (वार्ड 7 से 22)

विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र का दूसरा भाग।

3. झोटवाड़ा जोन (वार्ड 23 से 27)

झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रथम भाग।

4. वैशाली नगर जोन (वार्ड 28 से 37)

झोटवाड़ा विधानसभा का दूसरा भाग।

5. मानसरोवर जोन (वार्ड 38 से 49)

सांगानेर विधानसभा का पहला भाग।

6. सांगानेर जोन (वार्ड 47 से 58)

सांगानेर विधानसभा का दूसरा भाग।

7. जगतपुरा जोन (वार्ड 59 से 68)

बगरू विधानसभा का हिस्सा।

8. झालाना जोन (वार्ड 64 से 72)

बगरू क्षेत्र का दूसरा हिस्सा।

9. मालवीय नगर जोन (वार्ड 73 से 87)

मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र।

10. सिविल लाइंस जोन (वार्ड 88 से 103)

सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र शामिल।

11. किशनपोल जोन (वार्ड 104 से 115)

किशनपोल विधानसभा क्षेत्र।

12. आदर्श नगर जोन (वार्ड 116 से 132)

आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र।

13. आमेर–हवामहल संयुक्त जोन (वार्ड 133 से 150)

दोनों विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर एक जोन। 

आगे क्या?

स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि नए जोन गठन से प्रशासनिक सुगमता बढ़ेगी और विकास कार्यों का समान वितरण सुनिश्चित होगा।

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