Saturday, 29 August 2026

हाउसिंग बोर्ड की अवाप्त जमीन पर बनी 86 अवैध कॉलोनियों का मामला: हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी, सरकार को अंतिम मौका, प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब


हाउसिंग बोर्ड की अवाप्त जमीन पर बनी 86 अवैध कॉलोनियों का मामला: हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी, सरकार को अंतिम मौका, प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब

जयपुर। राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के लिए अवाप्त (अधिग्रहित) की गई जमीन पर अवैध रूप से विकसित की गई 86 कॉलोनियों के गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। एक्टिंग मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा अभी तक जवाब दाखिल न करने पर कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब सरकार को जवाब पेश करने का अंतिम अवसर दिया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पूर्व आदेशों की पालना में अब तक जो भी कार्रवाई हुई है, उसकी विस्तृत प्रोग्रेस रिपोर्ट अगली तिथि पर प्रस्तुत की जाए।

यह सुनवाई पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका पर हो रही थी। संस्था की ओर से अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड और जेडीए ने कोर्ट के 20 अगस्त के आदेश की पूरी तरह अवहेलना की है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी खारिज होने के बाद भी अधिकारियों ने न तो अतिक्रमण हटाया और न ही खाली पड़े बड़े प्लॉटों पर कब्जा लिया। कई जगह अभी भी निर्माण कार्य जारी है, जिससे सरकारी जमीन की हानि निरंतर बढ़ रही है।

भंडारी ने अवमानना की कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों और भूमाफियाओं की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर सोसायटियां काटी गईं, और सरकार ने कार्रवाई के बजाय 12 मार्च 2025 को कॉलोनियों को नियमित करने के आदेश तक जारी कर दिए।

कई कॉलोनियों की समितियों ने भी लगाई गुहार

सुनवाई के दौरान कई कॉलोनियों और विकास समितियों द्वारा पक्षकार बनने के आवेदन प्रस्तुत किए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि इन सभी को अगली सुनवाई पर सुना जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

याचिका के अनुसार—

  • सांगानेर के बी-2 बायपास से सांगानेर के बीच की जमीन हाउसिंग बोर्ड ने किसानों से अधिग्रहित की थी।

  • किसानों को भुगतान भी कर दिया गया था।

  • इसके बावजूद अधिकारियों ने भूमाफियाओं से मिलकर जमीन पर अवैध कॉलोनियां बसने दीं।

  • प्लॉट बेचे गए और कई स्थानों पर पक्का निर्माण भी हो चुका है।

  • हाईकोर्ट ने पहले आदेश देकर 8 सप्ताह में अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

लेकिन आदेश की पालना न होने पर अब अदालत ने सख्ती बढ़ाते हुए सरकार से अंतिम बार जवाब और प्रोग्रेस रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई में व्यापक सुनवाई होने की संभावना है।

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