Saturday, 29 August 2026

पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में 'दो बच्चों' की शर्त खत्म होने की तैयारी, जल्द आएगा अध्यादेश


पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में 'दो बच्चों' की शर्त खत्म होने की तैयारी, जल्द आएगा अध्यादेश

राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों से जुड़े एक बड़े बदलाव की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी कवायद तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस महीने के अंत तक वह अध्यादेश लाने की तैयारी में है, जिससे चुनाव लड़ने के लिए ‘दो बच्चों की अनिवार्यता’ समाप्त हो जाएगी। इस दिशा में पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने अपने-अपने संशोधन प्रस्ताव विधि विभाग को भेज दिए हैं। विधि विभाग की मंजूरी के बाद मामला कैबिनेट में जाएगा और कैबिनेट की सहमति मिलते ही अध्यादेश लागू कर दिया जाएगा।

इस कदम के साथ करीब 30 साल पुराना वह प्रावधान समाप्त हो जाएगा, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति पंचायत और निकाय के किसी भी चुनाव—जैसे सरपंच, पार्षद, नगरपालिका चेयरमैन, वार्ड सदस्य या जिला परिषद सदस्य—का चुनाव नहीं लड़ सकते थे। वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत की सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह प्रावधान लागू किया था। अब इसे पूरी तरह हटाने की तैयारी है, जिससे तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोग भी चुनावी दौड़ में शामिल हो सकेंगे।

संविधान के अनुसार, अध्यादेश लागू होने के बाद सरकार को छह माह के भीतर इसे विधानसभा में बिल के रूप में पेश करना और पारित कराना अनिवार्य है। हालांकि, राजस्थान में शीतकालीन सत्र दिसंबर के अंत में होने की संभावना है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार संशोधन बिल को बजट सत्र (फरवरी-मार्च 2026) में ही लाने के पक्ष में है। अगर बिल बजट सत्र में लाया गया, तो पंचायत और निकाय चुनावों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान में चुनाव आयोग मौजूदा कानून—जिसमें दो बच्चों की अनिवार्यता अभी भी लागू है—के आधार पर चुनावी तैयारी कर रहा है। ऐसे में चुनावी कार्यक्रम भी कुछ महीनों तक आगे खिसक सकते हैं।

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