



जयपुर। पांच दिनों से जारी निजी स्लीपर बस ऑपरेटरों की हड़ताल मंगलवार देर रात अचानक समाप्त हो गई। खास बात यह रही कि हड़ताल बिना किसी शर्त के वापस ली गई, जबकि सरकार की ओर से बस संचालकों की किसी मांग को लिखित रूप में नहीं माना गया।
बस ऑपरेटर पिछले दिनों रेगुलेशन नियमों में ढील और संचालन अनुमति से जुड़ी मांगों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे थे। लेकिन परिवहन विभाग की सचिव शुचि त्यागी के सख्त रुख के चलते यह दबाव काम नहीं आया। उन्होंने साफ कहा था कि नियमों का पालन किए बिना बसों को सड़कों पर नहीं चलने दिया जाएगा।
मंगलवार दोपहर तक बस संचालकों ने माहौल बनाने की कोशिश की और सरकार को चेतावनी दी कि यदि 5 नवंबर तक मांगें नहीं मानी गईं तो स्टेट कैरिज बसें भी हड़ताल में शामिल होंगी और 30 हजार निजी बसों का संचालन ठप कर दिया जाएगा।
लेकिन शाम तक स्थिति बदली और देर रात बस संचालकों व अपर परिवहन आयुक्त ओमप्रकाश बुनकर की बैठक के बाद हड़ताल बिना शर्त खत्म कर दी गई।
हड़ताल लंबी खिंचने से बस संचालकों में भी असंतोष और गुटबाजी बढ़ रही थी। जिनकी बसें खड़ी थीं, उन्हें लगातार नुकसान झेलना पड़ रहा था। वहीं, सचिव शुचि त्यागी किसी दबाव में आए बिना नियम लागू कराने पर अडिग रहीं। अंततः बस संचालक पीछे हटे और बुधवार सुबह से स्लीपर बसें फिर सड़क पर उतर आईं।
ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस यूनियन अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कहा कि हम यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सरकार जितने ही गंभीर हैं। बिना शर्त हड़ताल वापस लेते हैं। अब सभी बसें सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही चलेंगी। सड़क हादसों में जनहानि दुखद है। आगे से सभी नियमों का कड़ाई से पालन करेंगे।” इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश सरकार नियम विरुद्ध प्राइवेट बस संचालन पर सख्त है और प्रशासन की दृढ़ता के चलते निजी ऑपरेटरों को पीछे हटना पड़ा।