Saturday, 29 August 2026

अंता उपचुनाव: भाजपा–कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर, 11 नवंबर को वोटिंग ,मोरपाल बनाम भाया, नरेश मीणा से मुकाबला त्रिकोणीय


अंता उपचुनाव: भाजपा–कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर, 11 नवंबर को वोटिंग ,मोरपाल बनाम भाया, नरेश मीणा से मुकाबला त्रिकोणीय

बारां। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद अब तक हुए सात उपचुनावों में से पांच सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। अब बारी है बारां जिले की अंता विधानसभा सीट की, जहां 11 नवंबर को उपचुनाव होना है। यह उपचुनाव सत्ता पक्ष भाजपा और मुख्य विपक्ष कांग्रेस—दोनों की साख के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अंता सीट पर भाजपा ने पिछली बार की तर्ज पर इस बार भी नए चेहरे मोरपाल सुमन को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने अपने पुराने रणबांकुरे और दो बार विधायक एवं मंत्री रहे प्रमोद जैन भाया पर फिर भरोसा जताया है।

हालांकि सुर्खियों में रह चुके और निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है।

राजे फैक्टर और भाजपा की रणनीति

अंता सीट पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र और सांसद दुष्यंत सिंह के संसदीय क्षेत्र में आती है। मोरपाल सुमन को राजे का करीबी माना जा रहा है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ सहित पार्टी नेताओं का दावा है कि राज्य में भजनलाल शर्मा सरकार के कामकाज को जनता समर्थन दे रही है और कोई एंटी–इनकम्बेंसी नहीं है।

कांग्रेस का भरोसा भाया पर, प्रदेश नेतृत्व एक्टिव

कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट चुनाव प्रचार में जुटे हैं। कांग्रेस का कहना है कि भाया अनुभवी नेता हैं और जनता भाजपा सरकार से निराश है। इसलिए कांग्रेस को जीत की उम्मीद है।

त्रिकोणीय मुकाबले का संकेत — नरेश मीणा का दावा

देवली–उनियारा उपचुनाव में एसडीएम को थप्पड़ मारने वाली घटना के बाद चर्चा में आए नरेश मीणा भी मैदान में हैं।उन्हें SDPI का समर्थन मिला हैक्षेत्र में 30,000 से अधिक मीणा वोटर हैंनरेश खुद को तीसरा मजबूत विकल्प बता रहे हैं। यह उनका तीसरा विधानसभा चुनाव है।

पिछले उपचुनावों में भाजपा का दबदबा

गत वर्ष हुए उपचुनावों में भाजपा ने झुंझुनूं, खींवसर, रामगढ़, देवली–उनियारा और सलूंबर सीटें जीती थीं।इनमें भाजपा ने हनुमान बेनीवाल के खींवसर गढ़ को भी ध्वस्त किया था।ऐसे में एक बार फिर भाजपा जीत की हैट्रिक जारी रखने के दावे कर रही है, जबकि कांग्रेस खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में है। अंता उपचुनाव का नतीजा दोनों दलों के राजनीतिक समीकरणों के लिए अहम संकेत देगा।

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