



राजस्थान सहित देशभर में ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ओनर एसोसिएशन ने 31 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। इसके तहत गुरुवार आधी रात से प्रदेश में करीब 8,000 स्लीपर बसों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।
इस फैसले का सीधा असर राजस्थान से दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के बीच यात्रा करने वाले लगभग तीन लाख यात्रियों पर पड़ेगा।
राज्य के प्रमुख शहरों — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा और अलवर — से चलने वाली स्लीपर बसों की ऑनलाइन बुकिंग ट्रैवल एजेंसियों ने रोक दी है। कई निजी बस ऑपरेटरों ने टिकट रद्द करते हुए यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा साधनों का उपयोग करने की सलाह दी है।
एसोसिएशन ने बताया कि यह हड़ताल परिवहन विभाग द्वारा 29 अक्टूबर को जारी आदेशों के विरोध में की जा रही है।
ऑल इंडिया टूरिस्ट बस ओनर एसोसिएशन के सचिव राजेंद्र परिहार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यात्रियों को असुविधा के लिए खेद जताया और सरकार से वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपील की।
परिहार ने कहा कि हाल ही में परिवहन विभाग द्वारा अत्यधिक चेकिंग, जुर्माने और बसों को सीज करने की कार्रवाई से ऑपरेटरों में गहरा असंतोष है। उन्होंने कहा, “हमने सरकार से सुधार के लिए समय मांगा था, लेकिन बिना सुनवाई के एकतरफा कार्रवाई हो रही है।”
एसोसिएशन का आरोप है कि निजी बस ऑपरेटरों पर नियमों की सख्ती लागू की जा रही है, जबकि वही नियम राज्य परिवहन निगम (RSRTC) की बसों पर लागू नहीं किए जा रहे। उन्होंने कहा कि “यदि नियम समान हैं तो सरकारी बसों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा यह प्रतिस्पर्धा में असमानता है।”
बस ऑपरेटरों ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र हस्तक्षेप नहीं करती और एक समान नीति लागू नहीं करती, तो हड़ताल को और लंबा किया जाएगा। राज्य में हर दिन लाखों यात्री निजी स्लीपर बसों से सफर करते हैं। ऐसे में हड़ताल से न केवल आम यात्रियों को परेशानी होगी, बल्कि पर्यटन सीजन पर भी असर पड़ेगा।
एसोसिएशन ने यात्रियों से अपील की है कि वे हड़ताल के दौरान अपनी यात्रा योजनाएं स्थगित करें या वैकल्पिक साधनों जैसे रेल या अन्य सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। बस मालिक सोशल मीडिया और ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रियों को लगातार सूचित कर रहे हैं।