Saturday, 29 August 2026

जयपुर हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर अवैध कब्जों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज की, कहा—सरकारी जमीनों पर नियमितीकरण अस्वीकार्य


जयपुर हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर अवैध कब्जों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज की, कहा—सरकारी जमीनों पर नियमितीकरण अस्वीकार्य

जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर बने 87 अवैध कॉलोनियों के मामले में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिससे अब इन कॉलोनियों को हटाने का राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रहेगा।

मामला दरअसल पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। संस्था के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी, अभिनव भंडारी और डॉ. टीएन शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने 12 मार्च 2025 को एक आदेश जारी कर सांगानेर क्षेत्र की उन कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय लिया था, जिनकी भूमि राजस्थान आवासन मंडल द्वारा पहले ही अवाप्त (acquired) की जा चुकी थी। इन जमीनों पर बाद में अतिक्रमियों और भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया था।

अधिवक्ताओं के अनुसार, ये 87 कॉलोनियां बी-2 बाईपास से लेकर सांगानेर के अंदरूनी क्षेत्रों में फैली हैं। हाउसिंग बोर्ड ने इन जमीनों को किसानों से खरीदा और भुगतान भी किया था, लेकिन कुछ अधिकारियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से इन पर अवैध कॉलोनियां बस गईं। अब उन्हीं कॉलोनियों को सरकारी आदेशों के जरिए नियमित करने की कोशिश की जा रही थी, जो कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के खिलाफ है। इस नियमन आदेश को पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था ने राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर 20 अगस्त 2025 को जस्टिस एस. पी. शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों को कैसे नियमित किया जा सकता है? यह कानून और शासन व्यवस्था की अवमानना है।”

हाई कोर्ट ने 12.03.2025 के आदेश पर रोक लगाते हुए, राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि आठ सप्ताह के भीतर सभी अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें और उन अधिकारियों पर कार्रवाई करें, जिनकी मौजूदगी में अवैध कॉलोनियां बनीं। साथ ही, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को भी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए।

राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की मंशा पर नाराजगी व्यक्त की, यह कहते हुए कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी परिस्थिति में नियमित नहीं किए जा सकते।” न्यायालय की नाराजगी के बाद राज्य सरकार ने अपनी याचिका वापस लेने का निवेदन किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। कानूनी जानकारों के अनुसार इस निर्णय के बाद अब राज्य सरकार को हाई कोर्ट के आदेश का पालन कर अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी होगी।

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