Saturday, 29 August 2026

राजस्थान में दिवाली से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बड़ा फैसला: बोर्ड-निगम और विश्वविद्यालयों में ओपीएस की जगह फिर एनपीएस, सीपीएस, इपीएफ लागू


राजस्थान में दिवाली से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बड़ा फैसला: बोर्ड-निगम और विश्वविद्यालयों में ओपीएस की जगह फिर एनपीएस, सीपीएस, इपीएफ लागू

जयपुर। दिवाली से ठीक पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भाजपा ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालय, राजकीय उपक्रम और स्वायत्तशासी संस्थाओं में ओपीएस से पीछे हटते हुए इन संस्थाओं में फिर से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), सीपीएफ और ईपीएफ लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है।

कमजोर वित्तीय स्थिति वाले संस्थान ओपीएस लागू नहीं करेंगे

वित्त विभाग के आदेश के अनुसार, जो संस्थान कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण पेंशन दायित्व निभाने में सक्षम नहीं हैं, वे ओपीएस लागू नहीं करेंगे। ऐसे मामलों में कर्मचारियों से लिए गए नियोक्ता अंशदान की पूरी राशि पीडी खाते में अर्जित ब्याज सहित संबंधित कर्मचारी या पेंशनर को लौटाई जाएगी।

ओपीएस की वापसी और नई व्यवस्था

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 20 अप्रैल 2023 को अधिसूचना जारी कर “जीपीएफ लिंक्ड पेंशन स्कीम” लागू करने का निर्णय लिया था। इसके बाद 6 जून 2025 को ओपीएस की स्वीकृति देकर कर्मचारियों से विकल्प भी मांगे गए थे। लेकिन अब वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि जहां पर्याप्त पेंशन निधि नहीं है, वहां ओपीएस लागू करने के बजाय पूर्व की व्यवस्था—NPS, CPF या EPF—फिर से लागू होगी।

पेनल्टी का बोझ कर्मचारियों पर नहीं

आदेश में यह भी कहा गया है कि कटौती पुनः शुरू करने या राशि जमा कराने में यदि किसी प्रकार का विलंब या पेनल्टी लगती है, तो इसका भार कर्मचारी पर नहीं डाला जाएगा, बल्कि संबंधित संस्था ही इसे वहन करेगी।

ओपीएस पर मौन, UPS का विकल्प

राजस्थान सहित कई राज्यों में ओपीएस लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की घोषणा की थी। UPS में कर्मचारियों को ओपीएस जैसी कुछ सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया है। राजस्थान सरकार विधानसभा में इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने से बचती रही है और ओपीएस की वापसी पर अब तक गोलमोल जवाब ही सामने आए हैं। 

महासंघ का विरोध

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने इस आदेश की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकार को यह निर्णय तत्काल वापस लेना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति कमजोर है, उन्हें ओपीएस लागू रखने के लिए आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए ताकि कर्मचारियों के हित सुरक्षित रह सकें।

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