Saturday, 29 August 2026

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सहकारिता होगी सशक्त:नवीन को-ऑपरेटिव कोड से पारदर्शिता और विकास को मिलेगी नई गति


मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सहकारिता होगी सशक्त:नवीन को-ऑपरेटिव कोड से पारदर्शिता और विकास को मिलेगी नई गति

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को सशक्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार नवीन सहकारी अधिनियम लाने जा रही है, जो वर्तमान राजस्थान सहकारिता अधिनियम, 2001 की जगह लेगा। इस नए अधिनियम का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनियमितताओं पर नियंत्रण स्थापित करना और समितियों के व्यवसायिक विस्तार को गति देना है।

अध्ययन और मसौदा

नए अधिनियम का मसौदा तैयार करने के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी ने महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और केरल जैसे सहकारी आंदोलन के अग्रणी राज्यों के कानूनों का अध्ययन किया। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों से चर्चा कर एक आधुनिक और प्रासंगिक को-ऑपरेटिव कोड तैयार किया। इसमें समितियों के प्रबंधन से एकाधिपत्य हटाने, लोकतांत्रिक और सदस्योन्मुखी कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

प्रमुख प्रावधान

  • सदस्यता अभियान और जागरूकता: 2 से 15 अक्टूबर तक चल रहे अभियान में अब तक 3.75 लाख लोगों को नए अधिनियम की जानकारी दी जा चुकी है।

  • व्यापार विस्तार: समितियां अपने और अपने सदस्यों के उत्पाद कार्यक्षेत्र से बाहर भी बेच सकेंगी।

  • साझेदारी: समितियों को आपसी सहमत शर्तों पर बाजार प्रतिस्पर्धा बढ़ाने हेतु साझेदारी का अधिकार।

  • तदर्थ समिति: नई समितियों के गठन में बाधा होने पर रजिस्ट्रार 3 माह के लिए तदर्थ समिति गठित करेगा और उसके बाद चुनाव होंगे।

प्रशासनिक प्रावधान

  • आमसभा का आयोजन: सदस्यों को अब व्हाट्सएप और ई-मेल से सूचना दी जा सकेगी। बैठक न कराने पर जिम्मेदार पर ₹5,000 का अर्थदंड।

  • निर्योग्यता का प्रावधान: संचालक मंडल का कोई सदस्य तीन बैठकों में लगातार अनुपस्थित रहा तो अयोग्य घोषित किया जा सकेगा।

  • स्वायत्तता: जिन समितियों को सरकारी सहायता नहीं मिलती, उन्हें वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में अधिक स्वायत्तता दी जाएगी।
    पारदर्शिता और ऑडिट

  • ऑडिट व्यवस्था: समितियों को स्वयं ऑडिटर नियुक्त कर उसी वर्ष विभागीय पोर्टल पर अपलोड करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रार नियुक्त करेगा।

  • पब्लिक एक्सेस: ऑडिट रिपोर्ट जारी होने के 15 दिन में पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य।

  • अनियमितता पर कार्रवाई: गबन और गड़बड़ियों पर त्वरित अधिभार निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया।

विशेष प्रावधान

  • क्रेडिट सोसायटी: जमाकर्ताओं को सदस्य बनाकर ही जमा स्वीकार होगी। उनके विनियमन के लिए विनियामक बोर्ड का गठन।
    हाउसिंग सोसायटी: सदस्यों को धोखाधड़ी से बचाने हेतु सरकार नियम बनाएगी।

  • दुरुपयोग पर दंड: ‘सहकारी’ शब्द के गलत उपयोग पर ₹50,000 का जुर्माना।

  • डिजिटल संचार: नोटिस और आदेश व्हाट्सएप व ई-मेल से भेजे जा सकेंगे।
    रजिस्ट्रार की शक्ति: सोसायटी और सदस्यों के हित में आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार

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