



विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर से पहले बुधवार को यूनिसेफ राजस्थान और फ्यूचर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में रेडियो राउंडटेबल का आयोजन हुआ। इस अवसर पर अतिरिक्त मिशन निदेशक, एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला ने रेडियो कर्मियों से अपील की कि वे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश को आमजन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार और राजस्थान सरकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई अभियान चला रही हैं। 24 घंटे की हेल्पलाइन भी संचालित है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। “रेडियो की पहुँच बहुत बड़ी है। यदि रेडियो प्रेजेंटर्स इस जानकारी को लोगों तक पहुँचाएं तो मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को मदद मिलने में आसानी होगी।”
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य को आज की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि तनाव और अवसाद लोगों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने की ओर धकेल रहे हैं।
यूनिसेफ के रुशभ हेमानी ने कहा कि आत्महत्या के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। रेडियो जॉकी समाज में यह संदेश दे सकते हैं कि आत्महत्या कोई समाधान नहीं, बल्कि घातक परिणाम लेकर आती है।
डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखे तो उसे मानसिक अवसाद समझा जाना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को “पागलपन” से जोड़ना गलत है। यह जरूरी है कि परिवार और रिश्तों में संवाद कायम रहे।
डॉ. संजय निराला (यूनिसेफ चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट) ने कहा कि शहरों में आत्महत्या के मामले गांवों की तुलना में अधिक हैं। इसका कारण संयुक्त परिवारों का टूटना और अकेलापन है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा दोस्त होना चाहिए जिससे वह खुलकर अपनी बात साझा कर सके।
निरंतर पहल की आवश्यकता
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मीना शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं, फ्यूचर सोसाइटी की उपाध्यक्ष रविता शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की यह पहल लगातार जारी रहेगी। इसी क्रम में गुरुवार को मीडिया प्रतिनिधियों के साथ भी एक विशेष वर्कशॉप आयोजित की जाएगी।