



कांग्रेस में एकजुटता के दावों के बीच अजमेर में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक अशोक तंवर इन दिनों दौरे पर हैं और बार-बार पार्टी की एकजुटता की बात कर रहे हैं। लेकिन रविवार को शहर कांग्रेस कमेटी की बैठक में हुई कहासुनी और हंगामे के बाद अब यह विवाद सड़क पर पहुंच गया है।
आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ के खिलाफ शहर में टॉयलेट और अन्य जगहों पर पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में उन्हें “चोर-दलाल” बताया गया है। पोस्टरों पर लिखा गया – “कांग्रेस-देश में वोट चोर, गद्दी छोड़”, “कांग्रेस-अजमेर में दलाल व चोर, अजमेर छोड़”। इनमें राठौड़ की फोटो और नाम भी लगाया गया है।
धर्मेंद्र राठौड़ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाते हैं। अजमेर में उनके हस्तक्षेप को लेकर कांग्रेसियों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई है। यही विवाद रविवार को हंस पैराडाइज में हुई शहर कांग्रेस कमेटी की बैठक में भी देखने को मिला। बैठक के दौरान निवर्तमान जिलाध्यक्ष विजय जैन और राठौड़ समर्थक आमने-सामने हो गए। नारेबाजी और हंगामे के चलते माहौल गर्मा गया। करीब पंद्रह मिनट बाद वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
राठौड़ ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “मैं तो कांग्रेस पार्टी के काम से धरियावद में हूं। मुझे नहीं पता कि अजमेर में कोई पोस्टर लगे हैं। क्यों लगाए और किसने लगाए, इसका पता करता हूं।”

अजमेर में विवाद की जड़ गहलोत और पायलट गुट की खींचतान से जुड़ी है। धर्मेंद्र सिंह राठौड़, गहलोत खेमे के प्रमुख नेता माने जाते हैं, जबकि निवर्तमान जिलाध्यक्ष विजय जैन पायलट गुट से जुड़े रहे हैं। दोनों नेताओं में पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे हैं।
बैठक में विजय जैन ने अपने संबोधन में खुलकर राठौड़ पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “2016 में मुझे जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी, 2020 में पद भंग हो गया। उसके बाद भी पांच साल तक बिना पद के संगठन के लिए काम किया। हमने ऐतिहासिक काम किए, आंदोलन चलाए। जबकि धर्मेंद्र राठौड़ ने पार्षद चुनाव में 72 टिकट बांटे जिनमें से केवल 11 जीते, वहीं मुझे 8 टिकट दिए गए जिनमें से 7 जीते। पहले हम बीस-तीस हजार वोट से हारते थे, अब चार हजार से हारे हैं।”