



जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर खंडपीठ ने “Digital Payment Kit” खरीद में कथित घोटाले को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही राजकॉम्प इंफो सर्विसेज लिमिटेड और पांच अधिकारियों समेत आपूर्ति करने वाली फर्म सीआरआईएलपीएल को नोटिस जारी किया गया है।
मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ में हुई। खंडपीठ ने आश्चर्य जताया कि वर्ष 2020 में दायर जनहित याचिका पर आज तक एसीबी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने एसीबी को अंतिम अवसर देते हुए कहा कि यदि 15 दिन में जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
याचिकाकर्ता संस्था पब्लिक अगेंस्ट करप्शन की ओर से अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी और डॉ. टी.एन. शर्मा ने दलील दी कि सितंबर 2017 में ई-मित्र संचालकों के लिए डिजिटल पेमेंट किट खरीदने हेतु 19 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था, जिसे बाद में 33 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया।
इस टेंडर के तहत 8592 पेमेंट किट खरीदी जानी थीं। प्रत्येक किट में टैबलेट, पॉस मशीन, फिंगरप्रिंट स्कैनर और मासिक सब्सक्रिप्शन शामिल था। लेकिन मार्च 2019 तक केवल 4964 किट ही सक्रिय हो पाईं, बाकी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश किट्स पर एक भी लेन-देन (Transaction) नहीं हुआ, फिर भी सभी का पूरा भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, सब्सक्रिप्शन और रखरखाव के नाम पर संबंधित फर्म को 8 करोड़ रुपये अतिरिक्त दे दिए गए।
सीएजी (कैग) ने भी इस मामले में गंभीर आपत्तियां दर्ज की थीं, लेकिन विभाग ने उन्हें दरकिनार कर दिया। अधिवक्ता भंडारी का कहना है कि यह करोड़ों रुपये का घोटाला है जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत साफ दिखाई देती है।
हाईकोर्ट ने राजकॉम्प इंफो सर्विसेज लिमिटेड के साथ ही अधिकारियों हंसराज यादव,सीताराम स्वरूप,रणवीर सिंह,नीलेश शर्मा, कौशल, सुरेश गुप्ता तथा आपूर्ति करने वाली फर्म सीआरआईएलपीएल को नोटिस जारी किया है।