



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सुखमय और सम्मानजनक बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि बुजुर्ग जीवन के अंतिम पड़ाव को न केवल सहजता और सुविधा के साथ बिताएं, बल्कि उसमें आत्मसम्मान और आनंद भी महसूस करें।
प्रदेश में 63 वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं, जिनमें बुजुर्गों को आवास, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा, भक्त श्रवण कुमार कल्याण सेवा आश्रम (डे-केयर सेंटर्स) शुरू किए गए हैं, जहां बुजुर्गों को चिकित्सा, धार्मिक भ्रमण, प्रौढ़ शिक्षा और मनोरंजन की गतिविधियां उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकार ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम को पूरी सख्ती से लागू किया है। हर जिले में अपीलीय अधिकरण गठित किए गए हैं ताकि बुजुर्गों की उपेक्षा और संपत्ति से जुड़े विवादों का समयबद्ध समाधान हो सके।
राज्य में 45 पुनर्वास गृह संचालित किए जा रहे हैं, जहां असहाय और बेघर बुजुर्गों को आश्रय मिलता है। साथ ही, स्वयंसिद्धा आश्रम 17 जिलों में स्थापित किए गए हैं, जहां बुजुर्गों को आवास और पोषण के साथ आत्मसम्मानजनक जीवन की सुविधा दी जाती है।
राज्य सरकार ने अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा और सक्रिय जीवन का अवसर दिया है। साथ ही, वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन (14567) के जरिए पेंशन, स्वास्थ्य और कानूनी सहायता संबंधी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
बुजुर्गों के कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों और संस्थाओं को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (1 अक्टूबर) पर सम्मानित किया जाता है। इससे समाज में बुजुर्गों की देखभाल और सेवा को बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कहना है कि “वरिष्ठ नागरिक केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की धरोहर हैं। उनकी देखभाल और सम्मान पूरे समाज का कर्तव्य है। राज्य सरकार इस दायित्व को संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ निभा रही है।”