



पपीता (Papaya) एक साधारण-सा दिखने वाला लेकिन अत्यंत लाभकारी ट्रॉपिकल फल है। भारत, थाईलैंड और मैक्सिको जैसे देशों में उगने वाला यह फल विटामिन C, A, फोलेट, मैग्नीशियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। इसमें मौजूद पपेन एंजाइम और फाइबर पाचन को दुरुस्त करते हैं।
डॉक्टरों की मानें तो रोज़ाना 100-150 ग्राम पका हुआ पपीता खाने से कब्ज, गैस और अपच से राहत मिलती है, ब्लड शुगर संतुलित रहता है, वजन नियंत्रित होता है और त्वचा-बालों को प्राकृतिक ग्लो मिलता है। साथ ही, इसमें मौजूद लाइकोपीन और एंटीऑक्सीडेंट्स दिल की सेहत और इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं।
पपीते के पत्ते डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं, जबकि इसके बीज शरीर को डिटॉक्स करते हैं और पपीते का दूध (latex) त्वचा की डेड स्किन हटाने में मदद करता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं को कच्चा पपीता नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद लेटेक्स गर्भपात का कारण बन सकता है। इसी तरह, डायरिया के रोगियों को भी इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।
पाचन सुधारें – पपेन एंजाइम और फाइबर कब्ज व गैस से राहत देते हैं।
डायबिटीज़ कंट्रोल – Low GI फल होने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है।
वजन घटाने में मदद – फाइबर और कम कैलोरी भूख को नियंत्रित रखते हैं।
त्वचा व बालों के लिए फायदेमंद – विटामिन A और C से स्किन ग्लो करती है और दाग-धब्बे कम होते हैं।
दिल और इम्यूनिटी के लिए अच्छा – लाइकोपीन, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर दिल को स्वस्थ रखते हैं।
आंखों की सेहत – बीटा-कैरोटीन और विटामिन A नजर बेहतर करते हैं।
कैंसर व सूजन से सुरक्षा – एंटीऑक्सीडेंट्स और flavonoids फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं।
गर्भवती महिलाएं कच्चा पपीता न खाएं।
डायरिया या ढीले पेट के समय इसका सेवन न करें।
डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह लेकर ही सेवन करें।