



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) के 8 सितम्बर के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उस समय चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग की छूट दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि खंडपीठ के समक्ष मूल अपीलों का अंतिम निर्णय नहीं होने तक चयनितों को ट्रेनिंग या उससे संबंधित फील्ड-पोस्टिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा है कि वह इन अपीलों का निपटारा तीन माह के भीतर करे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश कैलाश चन्द्र शर्मा व अन्य की एसएलपी पर सुनवाई के दौरान दिया। प्रार्थियों की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव शकधर, ऋषभ संचेती और वकील हरेंद्र नील ने तर्क पेश किए कि खंडपीठ ने एकलपीठ के 28 अगस्त वाले भर्ती रद्द करने के आदेश पर रोक लगाते हुए चयनितों को ट्रेनिंग की छूट दी, जबकि फील्ड ट्रेनिंग में ट्रेनी को स्वतंत्र कार्यभार मिलने से संवेदनशील परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि राफेल-मामले की परंपरा के अनुसार कोई दस्तावेज अगर वास्तविक है तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता; लेकिन फिलहाल प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से चलनी चाहिए और अंतिम निर्णय तक प्रशिक्षण देना सही नहीं होगा। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने दलील दी कि चयनितों की फील्ड ट्रेनिंग जारी रखी जा सकती है, जबकि चयनितों के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी बहस कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनकर खंडपीठ के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी।
खंडपीठ (8 सितम्बर) के अंतरिम आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई।हाईकोर्ट को निर्देश: 3 माह के अंदर अपीलों का निपटारा करें। निपटारे तक न तो ट्रेनिंग और न ही फील्ड-पोस्टिंग की अनुमति होगी।
फरवरी 2021: राज्यसभा/भर्ती संबंधी पृष्ठभूमि से जुड़े घटनाक्रम (पेपर लीक से जुड़ी याचिकाएँ बाद में दायर)।
14 अगस्त 2025: हाईकोर्ट एकलपीठ ने पक्षकारों की बहस पूरी की; फैसला सुरक्षित रखा।
28 अगस्त 2025: हाईकोर्ट की एकलपीठ ने SI भर्ती रद्द करने का आदेश दिया।8 सितंबर 2025: हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने एकलपीठ के भर्ती रद्द करने वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए चयनितों को ट्रेनिंग की अनुमति दी (कुछ सीमाओं के साथ)।23/24 सितंबर 2025: मूल याचिकाकर्ताओं ने खंडपीठ के 8 सितंबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी; सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितम्बर को उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी और हाईकोर्ट को 3 महीने में अपीलों का निपटारा करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश फिलहाल यह सुनिश्चित करता है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो जाने तक चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग-आधारित अधिकार या फील्ड दायित्व सौंपे न जाएँ। अदालत ने मुकदमों के निपटारे की शीघ्रता के लिए समयसीमा भी तय की है ताकि लंबित विवाद जल्दी सुलझ सके और किसी भी प्रकार की संवैधानिक/प्रशासनिक गड़बड़ी का निष्पक्ष निवारण हो सके। इसके चलते फिलहाल जिन उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी जा रही थी, उनकी ट्रेनिंग रोकी जा सकती है तथा भर्ती रद्द करने के एकलपीठ आदेश की वैधता बनी रहेगी जब तक उच्च न्यायालय द्वारा विपरीत न कहा जाए।
तीन ट्रेनी एसआई गिरफ्तार — एसओजी की जांच में अब तक पेपर लीक माफिया व संबंधित लोगों पर कार्रवाई जारी है; बुधवार को तीन ट्रेनी एसआई-ों (परमेश चौधरी, मनोहर सिंह, मनोहर लाल) को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास परीक्षा से पहले ही सॉल्व पेपर मिलने के सबूत मिले। रैंकों में ये 200 से नीचे थे।
फर्जी डिग्री वाला शिक्षक — इसी दौरान अलग केस में एसओजी ने बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति पाए एक शिक्षक की जांच की; उसके बाद जिला परिषद ने 1993 की नियुक्ति आदेश रद्द किया।
पहले की कार्रवाइयाँ — जांच के दौरान अब तक SI भर्ती घोटाले से जुड़े कुल 130 लोगों (जिसमें 59 SI भी शामिल बताए गए) के गिरफ्तार होने के आँकड़े सामने आ चुके हैं; गिरोह पर किए गए आरोपों में फर्जी सॉल्व पेपर का वितरण और बड़े पैमाने पर भुगतान लेना शामिल है।