



जयपुर राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं में देरी के चलते चुनाव आगे खिसकने के संकेत मिल रहे हैं। प्रदेश के 309 स्थानीय निकायों में से 305 निकायों ने वार्ड पुनर्गठन और परिसीमन का काम पूरा कर लिया है, हालांकि अभी तक केवल 250 निकायों ने अधिसूचना जारी की है। शेष 55 निकायों की अधिसूचना जारी होना बाकी है, जबकि 4 निकायों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
इस बार प्रदेश में पहली बार 102 निकायों में SC, ST और OBC वर्ग से मेयर या चेयरमैन चुनकर आएंगे। साथ ही 3380 से अधिक वार्ड पार्षद आरक्षित वर्ग से होंगे। यह भी पहली बार है जब प्रदेश के 10245 वार्डों में चुनाव होंगे। अब तक अधिकतम 7475 वार्डों में ही चुनाव कराए गए थे। इस बार करीब 2700 नए वार्ड बनाए गए हैं।
अधिसूचना जारी करने में जयपुर सबसे आगे रहा। यहां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए दो नगर निगमों (हेरिटेज और ग्रेटर) को भाजपा सरकार ने फिर से एक कर दिया और एक ही नगर निगम के वार्ड पुनर्गठन की अधिसूचना जारी की। यही नहीं, भाजपा सरकार ने कांग्रेस सरकार के जयपुर, जोधपुर और कोटा में 2-2 निगम बनाने के फैसले को पलट दिया।
यूडीएच अधिकारियों के अनुसार, अब अगला चरण वार्ड आरक्षण का होगा।आरक्षण से पहले ओबीसी कमीशन से रिपोर्ट लेनी जरूरी होगी।इसके बाद ही मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा।
उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी कर पाएगा।यानी आरक्षण और मतदाता सूची पुनरीक्षण में समय लगने से चुनाव कार्यक्रम में देरी तय है।
20 अक्टूबर 2019 की अधिसूचना के तहत पिछले निकाय चुनाव में 121 निकायों में चुनाव हुए थे, जिनमें से 41 निकाय अध्यक्ष पद आरक्षित थे, जबकि 80 निकाय अनारक्षित थे। इस बार आरक्षित निकायों की संख्या कहीं अधिक होगी।
मतदाता सूचियों और परिसीमन को लेकर 20 जिलों में विवाद खड़े हो गए हैं।
कलेक्टरों ने राज्य निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा है।आपत्तियां क्षेत्र, वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची प्रकाशन से जुड़ी हैं।इन विवादों के चलते मतदाता सूची प्रकाशन कार्यक्रम में बदलाव तय माना जा रहा है।
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पहले कहा था कि हर हाल में चुनाव दिसंबर तक होंगे, लेकिन अब उनका कहना है कि चुनाव जनवरी तक कराए जाएंगे।