



जयपुर। समरावता विवाद के बाद सुर्खियों में आए सामाजिक कार्यकर्ता नरेश मीणा एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। शुक्रवार को उन्होंने जुलाई माह में पिपलोदी सरकारी स्कूल भवन ढहने से सात मासूम बच्चों की मौत के मामले में न्याय दिलाने के लिए आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की।
नरेश मीणा ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस धरने के दौरान वे मौन धारण करेंगे और केवल रोज दोपहर 3 बजे पांच मिनट के लिए अपने साथियों के साथ रणनीति पर चर्चा करेंगे।
मीणा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल भवन निर्माण में भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते यह भयावह त्रासदी हुई है, लेकिन अब तक दोषियों को कोई सजा नहीं मिली है। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए, दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और राज्यभर के स्कूलों की सुरक्षा जांच सुनिश्चित की जाए।
नरेश मीणा ने इस आंदोलन के लिए समर्थन भी मांगा। उन्होंने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को फोन कर पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया। साथ ही, मीणा ने पीड़ित परिवार को पांच बकरियां सौंपकर आर्थिक सहयोग का भी वादा किया।
उल्लेखनीय है कि जुलाई में झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल की पुरानी इमारत भारी बारिश के दौरान ढह गई थी, जिसमें सात मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर नरेश मीणा ने सरकारी लापरवाही के खिलाफ आंदोलन किया था, जिसके चलते उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में कोर्ट से राहत मिलने पर अब वे फिर से न्याय की लड़ाई में उतर आए हैं।