



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में सोमवार को जामडोली के विमंदित गृह में हुई मौतों और व्यवस्थाओं को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने सवाल उठाते हुए कहा कि विमंदित गृह में एक महिला की मौत के बाद छह दिन तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनके हस्तक्षेप के बाद ही अंतिम संस्कार हो पाया।
सवाल-जवाब के दौरान कांग्रेस विधायक ने यह भी पूछा कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा था, तो फिर अधीक्षक को सस्पेंड क्यों किया गया। इस पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने जवाब दिया कि अधीक्षक की कुछ कमियां सामने आई थीं और इस संबंध में एक समाचार रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी। उसी आधार पर अधीक्षक को निलंबित किया गया।
मंत्री गहलोत ने कांग्रेस शासनकाल और वर्तमान सरकार की तुलना करते हुए कहा— “कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 15 मौतें हुई थीं, जबकि हमारे दो साल के कार्यकाल में 4 मौतें हुई हैं।”
मंत्री गहलोत ने स्पष्ट किया कि विमंदित गृह में अज्ञात व्यक्ति की मौत होने पर सबसे पहले उसकी पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया की जाती है। इसी कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार के पास एक निर्धारित सर्कुलर और प्रक्रिया मौजूद है, जिसका पालन किया गया।
इस मुद्दे पर कुछ देर के लिए सदन में हंगामा और नोकझोंक भी हुई, लेकिन बाद में कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया।