



जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए भाजपा विधायक हरलाल सहारण के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की वापसी पर राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। यह मामला 10वीं कक्षा की मार्कशीट में हेराफेरी कर जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक पद और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े अपराध में अभियुक्त की अच्छी छवि या उसके विधानसभा सदस्य होने के आधार पर केस वापस नहीं लिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी और न्यायाधीश विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने राज्य सरकार से तीखे सवाल किए। पीठ ने पूछा कि क्या सरकार चाहती है कि तत्कालीन विधायक पुखराज गर्ग और इंदिरा बावरी के विरुद्ध केस की वापसी के चार साल पुराने आदेश पर अब भी सुनवाई हो?
यह मामला 25 अगस्त 2019 का है, जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भीड़ ने प्रशासन और पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। इसमें जेसीबी चालक फारूक खान की मौत हो गई थी। उस समय दोनों तत्कालीन विधायक इस केस में आरोपी बनाए गए थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए किसी अपराध का आरोप लगना गंभीर है।
ऐसे मामलों में केस वापस लेने का निर्णय न्यायहित के खिलाफ होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ किया कि सरकार को दो सप्ताह में अपना रुख स्पष्ट करना होगा कि वह केस वापसी चाहती है या नहीं।
इस मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्ष इसे जनप्रतिनिधियों के लिए अलग नियम बनाने की कोशिश बता रहा है, वहीं अदालत के फैसले ने यह संदेश दिया है कि जनप्रतिनिधि भी कानून से ऊपर नहीं हैं।